उत्तराखंड पीसीएस टॉपर जसमीत कौर: नौकरी के साथ पढ़ाई कर रचा इतिहास, बताया सफलता का मंत्र उत्तराखंड 13 घंटे पहले 3
ऊधम सिंह नगर की जसमीत कौर ने उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है। पहले प्रयास में 52वीं रैंक पाकर अधिकारी बनने के बावजूद उन्होंने नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी और दूसरे प्रयास में पूरे प्रदेश में टॉप किया।

उत्तराखंड पीसीएस का परिणाम घोषित होते ही ऊधम सिंह नगर की बेटी जसमीत कौर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह जसमीत का दूसरा प्रयास था। पहले प्रयास में उन्होंने 52वीं रैंक प्राप्त की थी और समाज कल्याण विभाग में अधिकारी बनी थीं, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने मेहनत नहीं छोड़ी और दूसरे अटेंप्ट में पूरे उत्तराखंड में टॉप कर दिखाया।

लगन और इच्छा-शक्ति की मिसाल

कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति के भीतर कुछ बड़ा कर दिखाने की सच्ची लगन और अटूट इच्छा-शक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। ऊधम सिंह नगर जिले के किच्छा स्थित ग्राम रामेश्वरपुर की रहने वाली जसमीत कौर इस बात को पूरी तरह चरितार्थ करती हैं। उन्होंने पहले ही प्रयास में पीसीएस परीक्षा 2021 में 52वीं रैंक हासिल कर जिला समाज कल्याण अधिकारी का पद पाया और फिर दूसरे प्रयास में पीसीएस परीक्षा 2024 में पूरे उत्तराखंड में पहला स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया।

पहले अटेंप्ट में 52वीं रैंक, नौकरी के साथ जारी रखी तैयारी

जसमीत कौर का परिवार पहले किच्छा के ग्राम रामेश्वरपुर में रहता था। उनके पिता जसवंत सिंह पाहवा ने रुद्रपुर में अपना कारोबार स्थापित करने के बाद रुद्रपुर के बागवाला में रहना शुरू कर दिया। जसमीत ने 2020-21 से पीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू की और पहली ही बार में 52वीं रैंक हासिल कर समाज कल्याण विभाग में अधिकारी बन गईं। अधिकारी बनने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और ड्यूटी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को निरंतर जारी रखा।

दूसरी बार पूरे प्रदेश की टॉपर

अपने लक्ष्य को पाने के लिए जसमीत लगातार प्रयासरत रहीं। उन्होंने पीसीएस परीक्षा 2024 का पेपर दिया और जब परिणाम आया तो पूरे उत्तराखंड में पहली रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया। इस सफलता के बाद से उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और पूरा परिवार उनकी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है।

पिता बोले- कभी बेटा-बेटी में फर्क नहीं किया

जसमीत कौर के पिता जसवंत सिंह पाहवा पेशे से व्यापारी हैं। उनके दो बेटे और एक बेटी जसमीत हैं। बातचीत में जसवंत सिंह पाहवा ने कहा कि उन्होंने कभी बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं किया। उनका हमेशा से यही लक्ष्य रहा कि बच्चे उनसे आगे बढ़ें, और आज बच्चों ने जो सफलता हासिल की है, उसने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

अपनी सफलता पर क्या बोलीं जसमीत

जसमीत कौर ने बताया कि उन्होंने 2020-21 में उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। पहली बार में 52वीं रैंक मिली, जिसके बाद वह समाज कल्याण अधिकारी बनीं और डेढ़ साल नौकरी की। वर्तमान में वह बागेश्वर जिले में तैनात हैं। दूसरे प्रयास में पीसीएस परीक्षा 2024 में उन्हें पूरे प्रदेश में पहला स्थान मिला, जिसे वह अपने लिए सौभाग्य की बात मानती हैं।

जिंदगी में क्या करना है, उसका लक्ष्य तय करो और फिर उस लक्ष्य को पाने के लिए लगातार प्रयास करते रहो, तो एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।
चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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