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5 घंटे पहले
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वॉशिंगटन: अमेरिका में H-1B वीजा पर लगाई गई 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख रुपये) की फीस को रद्द करने के अदालती आदेश के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के न्यायिक निर्णय देश को 'बहुत भारी नुकसान' पहुंचा रहे हैं। न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में NBA फाइनल देखने के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि संघीय अदालतें प्रशासन के लिए 'बहुत मुश्किलें खड़ी कर रही हैं।'
अदालत ने शुल्क को बताया अवैध
जजों पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने कहा, 'ये जज हमें बहुत परेशान कर रहे हैं, यह वाकई पागलपन है। वे हमारे देश को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।' दरअसल, मैसाचुसेट्स राज्य की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीजा पर लगाए गए 1 लाख डॉलर के शुल्क को निरस्त कर दिया। अदालत का कहना था कि यह शुल्क कांग्रेस की मंजूरी के बिना लागू किया गया था, इसलिए यह अवैध है। यह फैसला कैलिफोर्निया समेत 19 राज्यों की ओर से दायर की गई चुनौती के बाद आया।
अदालत ने क्यों ठहराया गैरकानूनी
ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में एक प्रोक्लेमेशन के माध्यम से नए H-1B वीजा आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस लागू की थी। अदालत ने इसे 'अवैध टैक्स' करार दिया, क्योंकि इसके लिए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की अनुमति नहीं ली गई थी। इससे पहले वॉशिंगटन की एक अदालत भी इसी तरह के आदेश को सही ठहरा चुकी है। अब व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि इस फैसले को अपील कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने कहा कि H-1B कार्यक्रम का 'दशकों से दुरुपयोग होता रहा है' और ट्रंप ने इसमें सुधार के लिए कदम उठाया है।
राजनीतिक स्तर पर समर्थन और विरोध
अदालत के इस फैसले को लेकर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने अदालत के फैसले का समर्थन किया है। उनका तर्क है कि इतनी भारी फीस का असर ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों और स्कूलों पर पड़ेगा, जहां विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत होती है। अलास्का की सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की ने कहा कि उनके राज्य के दूरदराज क्षेत्रों के स्कूल H-1B वीजा पर आए शिक्षकों पर निर्भर हैं। उन्होंने इस मुद्दे को पार्टी की राजनीति से ऊपर बताया। कांग्रेसमैन माइक लॉयर ने भी कहा कि वे स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारियों को इस फीस से राहत दिलाने के लिए द्विदलीय कानून पर काम कर रहे हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक सांसद डॉन बेयर ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को रोकता है। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि यह फीस अमेरिका में कुशल प्रतिभा के आने में बाधा बनती है और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने इसे 'प्रतिभा पर हमला' बताया। न्यू जर्सी की अटॉर्नी जनरल जेनिफर डेवेनपोर्ट ने भी कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यपालिका ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है।
फैसले का विरोध भी जारी
वहीं कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया है। एरिजोना के सांसद एली क्रेन ने कहा कि अदालत के निर्णय की अनदेखी कर कांग्रेस को कानून के जरिए सुधार करना चाहिए। उन्होंने 'End H-1B Visa Abuse Act of 2026' का समर्थन करने की बात कही। उल्लेखनीय है कि H-1B वीजा अमेरिका की गेस्ट वर्कर प्रणाली का अहम हिस्सा है। इसके तहत हर साल 65,000 सामान्य वीजा जारी किए जाते हैं, जबकि अमेरिका से उच्च शिक्षा हासिल करने वालों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीजा निर्धारित हैं।
भारत पर क्या पड़ेगा असर
आंकड़ों के अनुसार, करीब 7.30 लाख H-1B वीजा धारक अमेरिका में रहते हैं, जिनके साथ लगभग 5.50 लाख आश्रित भी रह रहे हैं। यह वीजा खासकर तकनीक, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में कुशल विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में काम करने का मौका देता है। भारत के लिहाज से यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि हर साल बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर H-1B वीजा के जरिए अमेरिका जाते हैं और अमेरिकी कंपनियां तकनीकी विशेषज्ञता के लिए भारतीय प्रतिभा पर काफी हद तक निर्भर रहती हैं।
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