जीवनशैली
6 घंटे पहले
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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में बसे कौसानी का अनासक्ति आश्रम सिर्फ एक धार्मिक या सैरगाह स्थल भर नहीं है, बल्कि यह महात्मा गांधी की स्मृतियों और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी एक जीवंत ऐतिहासिक धरोहर है। प्रकृति की गोद में बसा यह स्थान आज इतिहास प्रेमियों से लेकर शांति की तलाश करने वाले यात्रियों तक, सभी को अपनी ओर खींचता है।
गांधी जी का यहां प्रवास
साल 1929 में महात्मा गांधी इस स्थान पर पहुंचे थे और यहां उन्होंने 14 दिनों तक निवास किया। कौसानी की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने इसे भारत का मिनी स्विट्जरलैंड कह कर पुकारा। तभी से यह उपमा कौसानी की पहचान बन गई।
हिमालय का विहंगम दृश्य
आश्रम से करीब 350 किलोमीटर लंबी भव्य हिमालय पर्वतमाला का नजारा साफ-साफ दिखाई देता है। नंदा देवी जैसी ऊंची और बर्फ से ढकी चोटियां यहां से एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करती हैं, जो किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता।
शांति और प्रकृति का संगम
आज यह आश्रम इतिहास, प्रकृति और मानसिक शांति की तलाश में निकले लोगों के लिए एक आदर्श ठिकाना बन चुका है। छुट्टियों में यदि आप किसी शांत और सुंदर जगह की तलाश में हैं, तो कौसानी का अनासक्ति आश्रम आपकी यात्रा सूची में जरूर शामिल होना चाहिए।
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