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2 घंटे पहले
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बंजर जमीन बनी कमाई का जरिया
आमतौर पर झुलसा देने वाली गर्मी और तेज धूप को लोग परेशानी का सबब मानते हैं, लेकिन राजस्थान के फलोदी जिले की एक महिला किसान ने इसे ही अपनी आर्थिक तरक्की का आधार बना लिया है। खारा गांव की रहने वाली पप्पू देवी ने अपनी 23 बीघा बंजर पुश्तैनी जमीन को सौर ऊर्जा का हब बना दिया है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना (PM-KUSUM) का लाभ उठाकर उन्होंने यहां 2.5 मेगावाट का एक विशाल सोलर प्लांट स्थापित किया है।
8.5 करोड़ का निवेश और हर महीने 18 लाख की आय
इस प्रोजेक्ट को साकार करने में कुल 8.5 करोड़ रुपये की लागत आई है। सरकारी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद अगस्त 2025 में इस प्लांट ने काम करना शुरू किया। आज स्थिति यह है कि यह प्लांट हर दिन औसतन 18 से 19 हजार यूनिट बिजली का उत्पादन कर रहा है। उत्पादित बिजली को स्थानीय डिस्कॉम को बेचा जाता है, जिससे पप्पू देवी को हर महीने करीब 18 लाख रुपये की आय हो रही है।
स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार
पप्पू देवी की इस पहल ने न केवल उनकी किस्मत बदली है, बल्कि गांव के अन्य लोगों के लिए भी अवसर पैदा किए हैं। प्लांट के संचालन, रखरखाव और सुरक्षा के लिए गांव के चार युवाओं को स्थायी रोजगार मिला है। उनकी कार्यकुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने केवल दो महीने के रिकॉर्ड समय में इस प्लांट को तैयार कर दिया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने की सराहना
पप्पू देवी की इस उपलब्धि ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनके शानदार प्रदर्शन से प्रभावित होकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर चुके हैं और उनके प्रयासों की सराहना कर चुके हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त 2025 से दिसंबर 2025 के बीच इस प्लांट ने 18 लाख 65 हजार 428 यूनिट बिजली दी, जो जनवरी 2026 से मई 2026 के बीच बढ़कर 21 लाख 85 हजार 572 यूनिट तक पहुंच गई।
जिले में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का क्रेज
फलोदी डिस्कॉम के अधीक्षण अभियंता कमलसिंह मीणा के अनुसार, इस मॉडल से सरकार को सस्ती बिजली मिल रही है और किसानों को खेती के लिए बेहतर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। फलोदी में अब तक 322 सोलर प्लांट स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 268 प्लांट पहले ही काम करना शुरू कर चुके हैं। पप्पू देवी का यह सफर देश के अन्य किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल है।
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