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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान की सियासत में सेना का दबदबा
पाकिस्तान में सरकार और व्यवस्था को लेकर छिड़ी बहस के बीच एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। देश के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री का पद केवल एक दिखावा बनकर रह गया है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का यह कार्यकाल आखिरी साल हो सकता है, क्योंकि देश के असली सूत्रधार पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर बन चुके हैं।
शहबाज शरीफ बनाम आसिम मुनीर की स्थिति
मिफ्ताह इस्माइल ने एक पॉडकास्ट में चर्चा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों से लेकर घरेलू राजनीति तक, हर जगह आसिम मुनीर का प्रभाव शहबाज शरीफ पर भारी पड़ रहा है। उन्होंने गृह मंत्री मोहसिन नकवी की सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए बताया कि किस तरह से एक समझौते के लिए बधाई देते समय केवल सेना प्रमुख को श्रेय दिया गया और प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया गया। इस्माइल के अनुसार, यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कैबिनेट के भीतर भी शहबाज शरीफ की पकड़ कमजोर हो चुकी है।
आर्थिक बदहाली का हवाला
पूर्व मंत्री ने पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि बीते 4 सालों में देश अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। देश में गरीबी और बेरोजगारी अपने चरम स्तर पर है, जबकि विकास दर 4 फीसदी के आंकड़े को भी पार करने में विफल रही है। इस्माइल का मानना है कि इन विफलताओं के बावजूद शहबाज शरीफ केवल इसलिए पद पर बने हुए हैं क्योंकि उन्होंने पूरी तरह से सैन्य नेतृत्व के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
सेना ले रही है सभी बड़े फैसले
इस्माइल ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान में नीतिगत और सामरिक स्तर के सभी अहम निर्णय सेना प्रमुख द्वारा लिए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री केवल कुछ घरेलू मामलों तक सीमित होकर रह गए हैं, जबकि बड़े निर्णयों पर उनका कोई अधिकार नहीं बचा है। उनके दावों के अनुसार, शहबाज शरीफ का राजनीतिक भविष्य अब पूरी तरह से सेना की मर्जी पर निर्भर है और जल्द ही उनकी विदाई सुनिश्चित है।
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