घर पर बनाए आलू के चिप्स और पापड़, हर महीने 15 हजार तक की कमाई, दूर-दराज से पहुंचते हैं खरीदार व्यापार 4 महीने पहले 79
मुरादाबाद की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं घर पर आलू के चिप्स और पापड़ तैयार कर बाजार में बेच रही हैं। इस छोटे उद्यम से जहां उन्हें अच्छी कमाई हो रही है, वहीं कई अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में महिलाएं अब घर के चूल्हे-चौके तक सीमित न रहकर आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं। यहां महिलाओं का एक समूह घर पर ही आलू के चिप्स और पापड़ बनाकर बाजार तक पहुंचा रहा है। घरेलू स्वाद और साफ-सफाई की वजह से इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

छोटे उद्यम ने बदली जिंदगी

इस काम से जुड़ी महिलाएं अच्छा मुनाफा कमा रही हैं और आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। इसके साथ ही वे दूसरी बेरोजगार महिलाओं को भी अपने साथ जोड़कर उन्हें रोजगार दे रही हैं। घर बैठे शुरू हुआ यह छोटा कारोबार आज कई परिवारों की आमदनी का बड़ा सहारा बन चुका है।

समूह में 10 से 11 महिलाएं कर रहीं काम

समूह की अध्यक्ष रजनी ने बताया कि उनका समूह 'मां शारदा' के नाम से चल रहा है। उन्होंने कहा कि उनके अलग-अलग समूह संचालित हैं, जिनमें काफी संख्या में महिलाएं जुड़ी हैं और हर समूह अलग-अलग काम करता है। इस खास समूह में 10 से 11 महिलाएं आलू के चिप्स बनाने का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि ये चिप्स व्रत के लिए भी तैयार किए जाते हैं और बिना व्रत वाले भी बनाए जाते हैं।

ऐसे तैयार होते हैं चिप्स

रजनी ने बताया कि सबसे पहले सेंधा नमक डालकर आलू को अच्छी तरह उबाला जाता है, फिर उसे छीलकर साफ-सफाई के साथ तैयार किया जाता है। इसके बाद आलू को कसकर पानी से धोया जाता है और फिर पकाया जाता है। एक ही भाप में यह तैयार हो जाता है, जिसके बाद महिलाएं इसे एक-एक कर धूप में सुखाती हैं।

मंदिरों पर सबसे ज्यादा बिक्री

उन्होंने बताया कि चिप्स के सूख जाने पर उन्हें इकट्ठा किया जाता है और पॉलिथीन में पैक कर बाजार में बिक्री के लिए तैयार कर लिया जाता है। ये चिप्स व्रत में भी खाए जा सकते हैं और सामान्य दिनों में भी, इसलिए दोनों तरह की अलग-अलग वैरायटी तैयार की जा रही है। इनकी सबसे ज्यादा बिक्री मंदिरों पर हो रही है और शहर के लगभग सभी मंदिरों तक ये पहुंचाए जाते हैं।

दूर-दराज से आते हैं खरीदार

रजनी के मुताबिक, मुरादाबाद के अलावा संभल, कुंदरकी और बिलारी जैसे दूर-दराज के इलाकों से भी लोग इन चिप्स को खरीदने आते हैं। उन्होंने बताया कि कमाई की बात करें तो हर महिला इस काम से आसानी से 10 से 15 हजार रुपये तक की बचत कर लेती है और सभी महिलाएं काफी खुश हैं। ये महिलाएं न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि दूसरी बेरोजगार महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप