उपनाम: छपरा किसान
खेत के खर-पतवार और फालतू घास को बनाएं कीमती खाद, किसान ने साझा किया दवा बनाने का आसान तरीका
बिहार के छपरा में किसान अब कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में घर पर ही जैविक खाद और घास गलाने वाली दवा तैयार कर रहे हैं, जिससे खेती की लागत कम हो रही है और मिट्टी की सेहत में सुधार हो रहा है।
मछली पालन से बदल गई तकदीर, छपरा के इस किसान ने बंगाल और यूपी से सीखी तकनीक, अब हो रही लाखों की कमाई
बिहार के छपरा जिले के एक युवा किसान ने मछली पालन में नई तकनीक अपनाकर सफलता की मिसाल पेश की है। पप्पू कुमार यादव ने उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जाकर प्रशिक्षण लिया और अब पारंपरिक खेती से हटकर मोटी मुनाफा कमा रहे हैं।
छपरा में मौसमी की बागवानी से किसान की किस्मत बदली, सिर्फ 2 साल में फलों से लदे पेड़ और मोटी कमाई
छपरा के किसान नर्वदेश्वर गिरी जैविक विधि से 'न्यू सेलर बारी वन' किस्म की मीठी और बड़े आकार वाली मौसमी उगाकर बंपर मुनाफा कमा रहे हैं। मौसमी के साथ वे अमरूद, सहजन और मसालों की भी खेती करते हैं।
₹4000 किलो बिकता है इस बकरे का गोश्त, एक खस्सी से किसान कमा सकते हैं लाखों, फाइव स्टार होटलों में जबरदस्त मांग
छपरा के किसान मोहम्मद आसिब अफ्रीकन बोरगोट और तोता पड़ी नस्ल के खस्सी पाल रहे हैं, जिनका हाई-प्रोटीन मीट 4 से 5 हजार रुपये किलो तक बिकता है। चार स्टार और फाइव स्टार होटलों में इसकी भारी मांग है और एक खस्सी से किसान लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं।
'दूसरे की फैक्ट्री में 8 घंटे मजदूरी से अच्छा है अपने खेत पर 4 घंटे काम', छपरा के छेदी यादव बने मिसाल
छपरा के किसान छेदी प्रसाद यादव बाहर जाकर मजदूरी करने के बजाय अपने गांव में जैविक खेती कर रहे हैं। मचान विधि से 10 कट्ठा खेत में लौकी और कुंदरी उगाकर वे एक सीजन में ₹1.5 लाख तक कमा लेते हैं।
सक्सेस स्टोरी: मधुमक्खी पालन से सालाना ₹500000 की कमाई, किसान राजकिशोर ने यूं बदली अपनी तकदीर
छपरा के किसान राजकिशोर पटेल ने 1990 में महज 10 पेटी से मधुमक्खी पालन शुरू किया और आज 300 से अधिक पेटी के साथ हर साल घर बैठे 5 लाख रुपये कमा रहे हैं।
704 बैंगन ने पलट दी छपरा के किसान सुरेंद्र की तकदीर! एक बार रोपाई और 3 साल तक मुनाफा, समझिए पूरी तरकीब
छपरा के गरखा प्रखंड के किसान सुरेंद्र सिंह VNR कंपनी की 704 बैंगन वैरायटी से जैविक खेती कर रहे हैं और 10 कट्ठा से ही बढ़िया कमाई कर रहे हैं। एक बार पौधा लगाने के बाद वे लगातार 2-3 साल तक इससे फलन लेकर मुनाफा कमाते हैं।