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एक घंटा पहले
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बुरहानपुर में डेयरी व्यवसाय की मिसाल
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में पशुपालन आज के दौर में न केवल एक पारंपरिक कार्य है, बल्कि कई परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार भी बन चुका है। शिकारपुरा क्षेत्र में रहने वाले जितेंद्र का सफर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे छोटी शुरुआत बड़े बदलाव ला सकती है। जितेंद्र का डेयरी का व्यवसाय आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय है, जिसकी नींव दो साधारण भैंसों के साथ रखी गई थी।
नानी के आशीर्वाद से मिली शुरुआत
जितेंद्र के डेयरी व्यवसाय की कहानी काफी दिलचस्प है। उन्हें यह व्यवसाय शुरू करने की प्रेरणा और संसाधन कहीं बाहर से नहीं, बल्कि अपने परिवार से ही मिले थे। जितेंद्र को उनकी नानी ने उपहार स्वरूप दो भैंसें दी थीं। इसे नानी का आशीर्वाद मानते हुए उन्होंने इन पशुओं की सेवा और देखभाल शुरू की। शुरुआत में यह काम सिर्फ परिवार की जरूरतें पूरी करने तक सीमित था, लेकिन जितेंद्र की कड़ी मेहनत और समर्पण ने इसे एक व्यवस्थित व्यापार में बदल दिया। देखते ही देखते पशुओं की संख्या बढ़ने लगी और आज उनके पास 15 से 20 पशु मौजूद हैं।
सफलता का मूल मंत्र: देखभाल और प्रबंधन
पशुपालन के क्षेत्र में सफलता के बारे में बात करते हुए जितेंद्र बताते हैं कि यह काम जितना आसान दिखता है, उतना है नहीं। इसमें पशुओं के स्वास्थ्य और खान-पान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। वे अपने डेयरी फार्म में पशुओं को समय पर चारा और स्वच्छ पानी देने के साथ-साथ उनकी अन्य जरूरी सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखते हैं। एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास लगभग 70 पशु हो गए थे। जितेंद्र के अनुसार, डेयरी व्यवसाय में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है और कई बार नुकसान का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन हिम्मत हारने के बजाय निरंतरता बनाए रखना ही सफलता की कुंजी है।
आर्थिक मजबूती और दूसरों को रोजगार
आज इस डेयरी व्यवसाय से जितेंद्र का परिवार न केवल आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ है, बल्कि वे दूसरों के लिए भी मददगार साबित हो रहे हैं। उनकी डेयरी में वर्तमान में दो लोगों को रोजगार मिला हुआ है। यह साबित करता है कि अगर लगन से काम किया जाए, तो छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी बड़ा रूप ले सकता है। जितेंद्र और उनका परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से पशुपालन और डेयरी के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। वे मुख्य रूप से देशी और मुर्रा प्रजाति की भैंसों का पालन कर रहे हैं, जिससे उन्हें उच्च गुणवत्ता वाला दूध प्राप्त होता है। उनकी मेहनत और दूरदर्शिता आज न केवल उनके परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन चुकी है, बल्कि क्षेत्र के अन्य युवाओं और पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।
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