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9 घंटे पहले
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विचारों
संघर्ष से सफलता तक की दास्तान
बिहार के बेगूसराय जिले की रहने वाली प्रेमलता कुमारी की कहानी एक साधारण गृहिणी से सफल उद्यमी बनने की प्रेरणादायक यात्रा है। एक समय था जब प्रेमलता केवल घर के कामकाज तक सीमित थीं, लेकिन परिवार पर आई अचानक मुसीबत ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए मजबूर कर दिया। आज उनकी पहचान एक ऐसी महिला के रूप में है, जिसने 40 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी से अपना छोटा सा काम शुरू किया और कड़ी मेहनत के दम पर उसे 10 लाख रुपये के शानदार सेटअप में बदल दिया। उनके द्वारा बनाई गई अगरबत्ती और धूपबत्ती की मांग अब केवल उनके शहर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में भी उनके उत्पादों को पसंद किया जा रहा है।
जीविका से जुड़कर मिली नई राह
प्रेमलता का यह सफर साल 2017 में शुरू हुआ था। उस समय तक वह एक गृहिणी की भूमिका निभा रही थीं, लेकिन पति के साथ हुए एक हादसे ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। दुर्घटना में पति का एक हाथ गंवाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट के बादल छा गए। उनके दोनों बेटे डीएवी स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे, और प्रेमलता को चिंता सता रही थी कि बच्चों की शिक्षा कैसे पूरी होगी। इसी कठिन दौर में उन्हें जीविका परियोजना के बारे में पता चला। उन्होंने इस समूह से जुड़ने का फैसला किया और 10 दिनों का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद, समूह की बैठक में विचार-विमर्श हुआ और उन्हें 40 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की गई। यही वह शुरुआती रकम थी जिसने उनके कारोबार की नींव रखी।
बरामदे से छत तक पहुंचा कारोबार
शुरुआत में प्रेमलता ने अपने घर के बरामदे में ही अगरबत्ती बनाने का छोटा सा काम शुरू किया था। उस दौरान वह मुख्य रूप से काली अगरबत्ती बनाती थीं। जैसे-जैसे उन्हें बाजार की समझ हुई, उन्होंने अपने उत्पादों का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने सफेद और रंगीन अगरबत्तियों के साथ-साथ फूल वाली अगरबत्ती और धूपबत्ती का भी उत्पादन शुरू किया। समय के साथ मांग में हुई बढ़ोतरी के चलते बरामदा छोटा पड़ने लगा, जिसके बाद उन्होंने घर की छत पर एक हॉल का निर्माण कराया। आज उनका यह उत्पादन केंद्र प्रेरणा अगरबत्ती के नाम से जाना जाता है, जहां नियमित तौर पर काम किया जाता है।
दैनिक उत्पादन और ग्राहकों का दायरा
वर्तमान में प्रेमलता के केंद्र पर अगरबत्ती और धूपबत्ती का कुल उत्पादन प्रतिदिन 40 किलो तक पहुंच चुका है। उनके इस 10 लाख रुपये के कारोबार में पांच अन्य महिलाएं भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। प्रेमलता का कहना है कि उनकी कमाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके केंद्र से प्रतिदिन करीब 8 से 10 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती है। उनके उत्पादों में मोगरा, रजनीगंधा, चंदन और गुलाब जैसी लोकप्रिय खुशबू शामिल हैं। इसके अलावा, शुद्ध हवन सामग्री से तैयार की गई धूपबत्ती भी ग्राहकों की पहली पसंद बनी हुई है। उन्होंने ग्राहकों की सुविधा के लिए 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के अलग-अलग पैकेट बाजार में उपलब्ध कराए हैं।
दूर-दूर तक है उत्पादों की मांग
प्रेमलता के काम की सबसे खास बात यह है कि पटना जैसे शहरों में उनके उत्पादों के लिए एक बड़ा ग्राहक आधार बन चुका है। पिछले तीन वर्षों से 150 से 200 ग्राहक लगातार उनके उत्पादों को ऑर्डर कर रहे हैं। कई ग्राहक एक बार में 1,000 से 2,000 रुपये तक की अगरबत्ती और धूपबत्ती मंगवाते हैं। ग्राहक उन्हें फोन या इंटरनेट के माध्यम से संपर्क करते हैं और वे कूरियर के जरिए सामान उन तक पहुंचाती हैं। प्रेमलता कहती हैं कि बाजार में अगरबत्ती के सैकड़ों विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन जब कोई ग्राहक कूरियर का अतिरिक्त शुल्क देकर भी उनसे सामान मंगवाता है, तो उन्हें अपार खुशी होती है। उनका मानना है कि यह उनके काम की गुणवत्ता पर लोगों के भरोसे का नतीजा है।
बच्चों का भविष्य और वर्तमान स्थिति
प्रेमलता के लिए यह केवल आर्थिक लाभ का जरिया नहीं था, बल्कि परिवार को सहेजने का एक माध्यम था। उन्होंने अपने काम से हुई कमाई का उपयोग बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया। आज उनके दोनों बेटे सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे हैं। प्रेमलता की यह कामयाबी न केवल उनके लिए गर्व की बात है, बल्कि बेगूसराय और आसपास के क्षेत्रों की अन्य महिलाओं के लिए भी एक बड़ा उदाहरण पेश करती है कि कैसे जीविका और दृढ़ संकल्प के जरिए जीवन की चुनौतियों को मात दी जा सकती है।
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