भाई की सलाह से बदली तकदीर: केले के रेशे से तैयार उत्पादों ने मनीषा को बनाया लखपति दीदी व्यापार 3 घंटे पहले 5
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में एक महिला ने केले के बेकार तनों से बेहतरीन उत्पाद बनाकर न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी आय का जरिया खोल दिया है।

केले के तने से नई शुरुआत

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में इन दिनों एक अनूठी सफलता की कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है। यहाँ की रहने वाली मनीषा बाई ने खेती में बेकार समझे जाने वाले केले के तनों को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। पहले जो तना खेतों में यूं ही सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता था, आज वह महिलाओं के लिए स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बन गया है। मनीषा की यह पहल न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण की एक मिसाल भी पेश कर रही है।

भाई से मिली प्रेरणा और दिशा

मनीषा बाई की इस यात्रा की शुरुआत उनके भाई के मार्गदर्शन से हुई थी। उनके भाई ने केले के रेशे से विभिन्न वस्तुएं बनाने का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया था। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने अपनी बहन की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें भी इस हुनर को सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। भाई की दी गई सलाह मनीषा के मन को छू गई और उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने न केवल खुद इस कला को सीखा, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी एकजुट किया और केले के तनों से रेशा निकालने का काम शुरू किया।

विभिन्न उत्पादों का निर्माण

मनीषा और उनकी टीम आज केले के रेशों का उपयोग करके कई तरह की उपयोगी और आकर्षक वस्तुएं बना रही हैं। इन उत्पादों की सूची में मोबाइल कवर, डस्टबिन, पानी की बोतलों के कवर, राखी और विभिन्न प्रकार के बैग प्रमुख हैं। इन सामानों की बाजार में अच्छी मांग है और इनकी बिक्री से मनीषा और उनके साथ काम करने वाली महिलाओं को नियमित आमदनी प्राप्त हो रही है। अपनी मेहनत और हुनर के दम पर मनीषा ने साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के साथ भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

8 से 10 महिलाओं को दिया रोजगार

इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल एक व्यक्ति का काम नहीं रह गया है, बल्कि इससे गांव की 8 से 10 अन्य महिलाओं को भी नियमित रोजगार मिला है। कक्षा छठवीं तक शिक्षा प्राप्त मनीषा आज अपनी आर्थिक स्थिति में बड़े सुधार के बाद लखपति दीदी के नाम से पहचानी जाने लगी हैं। उनका कहना है कि जो तना कभी कचरा माना जाता था, आज वही उनके परिवार और साथी महिलाओं की आजीविका का मुख्य आधार बन गया है। मनीषा का यह सफर उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो सही मार्गदर्शन मिलने पर अपने हुनर से एक नई पहचान बनाने की इच्छा रखती हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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