बिहार
एक घंटा पहले
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उद्घाटन के बाद वीरान पड़ा पंचायत भवन
बिहार के सीतामढ़ी जिले के सुरसंड प्रखंड के अंतर्गत आने वाली कुम्मा राजकुम्मा पंचायत में बना पंचायत सरकार भवन इन दिनों भारी बदहाली और उपेक्षा का शिकार है। लाखों रुपये की भारी भरकम राशि खर्च करके तैयार की गई यह इमारत जनता की सेवा के बजाय अब खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। इस भवन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को पंचायत से जुड़ी सभी सरकारी सुविधाएं और सेवाएँ एक ही छत के नीचे मुहैया कराना था, ताकि उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। हालांकि, धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है और उद्घाटन के करीब एक साल बाद भी यहां किसी भी प्रकार का सरकारी कामकाज सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाया है।
एक वर्ष बाद भी सेवाओं का अभाव
स्थानीय निवासियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पंचायत सरकार भवन का भव्य उद्घाटन 1 अक्टूबर 2025 को किया गया था। इस दौरान जनता को यह उम्मीद थी कि अब उन्हें अपने जरूरी सरकारी कागजात या अन्य कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। लेकिन जुलाई 2026 तक यानी पूरा एक साल बीत जाने के बावजूद, इस भवन में किसी भी अधिकारी या सरकारी कर्मचारी की नियमित तैनाती नहीं हो सकी है। कर्मचारी न होने की वजह से पूरा भवन लगभग खाली पड़ा रहता है और यहां कोई प्रशासनिक गतिविधि नहीं देखी जाती।
देखरेख के अभाव में जर्जर होती इमारत
लंबे समय से खाली पड़े रहने के कारण इस नई इमारत की हालत तेजी से खराब हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उचित रखरखाव और देखरेख न मिलने के कारण अब भवन के ढांचे में दरारें और अन्य कमियां आने लगी हैं। कई खिड़कियां टूट चुकी हैं और उनमें लगे कांच भी चकनाचूर हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि जिस तरह से इमारत का रखरखाव किया जा रहा है, उससे यह साफ है कि आने वाले समय में यह भवन पूरी तरह से जर्जर होकर खंडहर में बदल जाएगा। समय रहते अगर प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली, तो सरकारी धन का यह निवेश पूरी तरह से बेकार साबित होगा।
असामाजिक तत्वों का बना अड्डा
पंचायत भवन की सबसे चिंताजनक स्थिति शाम के समय देखने को मिलती है। अनिल कुमार और पंचायत के अन्य स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि जैसे ही दिन ढलता है और शाम होती है, यह भवन असामाजिक तत्वों का सुरक्षित ठिकाना बन जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि आस-पास के कुछ लोग यहां एकत्रित होकर नशा करते हैं और भवन के अंदर तोड़फोड़ भी की जाती है। सरकारी संपत्ति को लगातार नुकसान पहुँचाया जा रहा है, जिससे इलाके के सभ्य नागरिक और महिलाएं काफी भयभीत और चिंतित हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन यहां स्थायी रूप से कर्मचारियों को बिठाना शुरू कर दे, तो इस तरह की आपराधिक और असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सकती है।
प्रशासन से सुरक्षा की मांग
ग्रामीणों में व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये फूंककर इमारत तो खड़ी कर दी गई, लेकिन उसे कार्यात्मक बनाने के लिए कोई भी योजना नहीं बनाई गई। लोगों का साफ तौर पर मानना है कि यह केवल प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही की एक बड़ी तस्वीर है। पंचायत के लोग अब जिला प्रशासन से यह मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द इस भवन में कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए और कामकाज शुरू कराया जाए। साथ ही, उन्होंने भवन की सुरक्षा और रखरखाव के लिए तत्काल कदम उठाने की भी अपील की है। ग्रामीण अभी भी प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि पंचायत सरकार भवन वास्तव में आम जनता की सेवा का केंद्र बनेगा, न कि उपेक्षा और असामाजिक गतिविधियों का अड्डा।
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