क्राइम
एक दिन पहले
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डिजिटल अरेस्ट का नया शिकार बने सेवानिवृत्त बैंककर्मी
राजस्थान के सीकर जिले से साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर एक 65 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी को अपना शिकार बनाया और उनसे 55 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि ठग ली। ठगों ने पीड़ित को इस कदर डराया कि उन्होंने अपनी जमा-पूंजी अपराधियों के हवाले कर दी।
जांच एजेंसियों का फर्जी रूप धरकर डराया
पीड़ित को अपने झांसे में लेने के लिए आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी, ईडी और न्यायिक विभाग का अधिकारी बताया। उन्होंने पीड़ित के पास व्हाट्सएप वीडियो कॉल किया और लगातार दो दिनों तक पूछताछ का नाटक किया। इस दौरान ठगों ने पीड़ित के सामने कई बड़े और झूठे दावे किए:
- पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग के फर्जी मामले में संलिप्त होने का आरोप लगाया गया।
- दावा किया गया कि पीड़ित के खिलाफ कुल 24 मुकदमे दर्ज हैं।
- पीड़ित के खाते से 6.80 करोड़ रुपये के संदिग्ध और अवैध लेनदेन की बात कही गई।
वीडियो कॉल पर दिखाया नकली कोर्ट का नजारा
ठगी को असली रूप देने के लिए जालसाजों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर एक फर्जी कोर्ट रूम और नकली जज का दृश्य भी दिखाया। इसके बाद पीड़ित के मन में यह खौफ पैदा कर दिया गया कि उनकी सारी संपत्ति जब्त हो जाएगी और उनकी जमानत भी खारिज कर दी जाएगी। इस मनोवैज्ञानिक दबाव में आकर पीड़ित घबरा गए और उन्होंने अपराधियों के बताए बैंक खातों में दो किस्तों में कुल 55 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। पहली किस्त में 30 लाख रुपये और दूसरी किस्त में 25 लाख रुपये भेजे गए।
साइबर थाने में मामला दर्ज
ठगे जाने का अहसास होने के बाद पीड़ित ने तुरंत इस धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल, सीकर साइबर थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संदिग्ध बैंक खातों, आरोपियों के मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड के आधार पर अपराधियों की पहचान और धरपकड़ करने में जुट गई है।
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