भोजपुर: प्रो-ट्रे तकनीक अपनाकर मालामाल हो रहे किसान, 21 दिन में ही बिक जाते हैं लाखों के पौधे बिहार 2 महीने पहले 81
बिहार के भोजपुर जिले के एक प्रगतिशील किसान ने प्रो-ट्रे तकनीक का इस्तेमाल करके खेती के पारंपरिक तरीकों को बदल दिया है। वे महज 21 दिनों में स्वस्थ पौधे तैयार कर न केवल बिहार बल्कि दूसरे राज्यों में भी आपूर्ति कर रहे हैं।

खेती में आधुनिक तकनीक का कमाल

क्या आपने कभी यह कल्पना की है कि केवल 21 दिन में पौधों को तैयार करके लाखों रुपये कमाए जा सकते हैं? यह सुनकर भले ही हैरान करने वाला लगे, लेकिन भोजपुर जिले के एक किसान ने इसे हकीकत में बदल दिखाया है। उन्होंने प्रो-ट्रे तकनीक का उपयोग करके खेती के व्यापार में एक नई मिसाल कायम की है। आज स्थिति यह है कि उनके द्वारा तैयार पौधों की मांग केवल बिहार के स्थानीय इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़े पैमाने पर ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं।

प्रो-ट्रे तकनीक की खूबियां

इस आधुनिक विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पौधों में कीटों और बीमारियों का प्रकोप न के बराबर होता है। चूंकि इन पौधों को पॉलीहाउस और शेडनेट के सुरक्षित वातावरण में तैयार किया जाता है, इसलिए इनकी गुणवत्ता और मजबूती पारंपरिक पौधों की तुलना में काफी अधिक होती है। यही मुख्य कारण है कि बाजार में इन पौधों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और किसान इनका चुनाव करने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।

सब्जियों की विस्तृत श्रृंखला

आशुतोष बताते हैं कि उन्होंने इस काम की शुरुआत काफी छोटे स्तर पर की थी, लेकिन अब उनका काम काफी विस्तारित हो चुका है। उनके केंद्र पर मुख्य रूप से निम्नलिखित सब्जियों के पौधे तैयार किए जाते हैं:

  • टमाटर
  • मिर्च
  • बैंगन
  • पत्ता गोभी
  • खीरा
  • करैला
  • नेनुआ

आज उनके यहां से बड़ी संख्या में पौधे बिहार के अलग-अलग जिलों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और अन्य सीमावर्ती राज्यों में भी भेजे जा रहे हैं, जिससे उनकी आय में भारी बढ़ोतरी हुई है।

किसानों के लिए समय की बचत और लाभ

प्रो-ट्रे तकनीक किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस पद्धति के उपयोग से किसानों को नर्सरी में बीज खराब होने, बार-बार सिंचाई करने या पौधों की अत्यधिक देखभाल करने की चिंता से मुक्ति मिलती है। चूँकि पौधे सीधे खेत में लगाने के लिए पूरी तरह तैयार मिलते हैं, इसलिए फसल की पैदावार जल्दी होती है और बाजार में समय से पहले उत्पाद पहुँचने के कारण किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलता है।

खेती बनी एक मुनाफे का व्यवसाय

भोजपुर के इस किसान का सफर यह साबित करता है कि अगर सही तकनीक और आधुनिक सोच को अपनाया जाए, तो कृषि को सिर्फ जीवन-निर्वाह का साधन नहीं बल्कि एक अत्यंत लाभदायक व्यापार बनाया जा सकता है। वे न केवल स्वयं इस तकनीक से लाभ कमा रहे हैं, बल्कि आसपास के हजारों किसानों को भी आधुनिक खेती के आधुनिक तौर-तरीकों के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। आने वाले समय में अगर अन्य किसान भी इसी प्रकार की नवाचारी पद्धतियों को अपनाते हैं, तो निश्चित रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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