वास्तु टिप्स: मुख्य द्वार पर पायदान रखने का सही नियम, जूट और सही रंग लाएगा घर में सुख-समृद्धि हरियाणा एक महीने पहले 73
घर के मुख्य द्वार पर रखा पायदान केवल पैरों की धूल साफ करने के लिए नहीं होता, बल्कि वास्तु के अनुसार यह सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि के आगमन का जरिया भी है।

मुख्य द्वार और वास्तु का गहरा कनेक्शन

हम अक्सर अपने घरों को सुंदर बनाने के लिए तरह-तरह के सजावटी सामानों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर रखी एक छोटी सी चीज भी आपके जीवन और घर की सुख-समृद्धि को गहराई से प्रभावित कर सकती है? वास्तु शास्त्र और हिंदू धार्मिक मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार का विशेष महत्व बताया गया है। मुख्य द्वार केवल घर के भीतर आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यह वह स्थान है जहां से देवी लक्ष्मी, सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। ऐसे में मुख्य द्वार पर रखा जाने वाला पायदान यानी फुटमैट केवल पैरों की धूल साफ करने का जरिया नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध घर के वातावरण को पवित्र और खुशहाल बनाए रखने से भी है।

पायदान की स्थिति और सफाई का महत्व

मुख्य द्वार पर रखे पायदान की स्थिति घर की ऊर्जा को कैसे प्रभावित करती है, इस बारे में अंबाला के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने लोकल18 को बताया कि घर के प्रवेश द्वार पर रखी हर एक वस्तु का सीधा असर घर के भीतर की ऊर्जा पर पड़ता है। यदि आपके घर का पायदान सही सामग्री से बना हो, उसका रंग उचित हो और उसका आकार वास्तु के अनुकूल हो, तो यह घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को काफी गुना बढ़ा देता है। इसके विपरीत, यदि मुख्य द्वार पर गंदा, फटा हुआ या अनुपयुक्त पायदान रखा हो, तो यह घर में नकारात्मकता को आमंत्रित करता है। इसलिए पायदान को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए और यदि वह पुराना या फटा हुआ हो, तो उसे समय-समय पर बदलते रहना बेहद जरूरी है।

जूट का पायदान क्यों माना जाता है सबसे शुभ?

आजकल बाजारों में प्लास्टिक, फाइबर, रबर और कपड़े से बने कई तरह के फैंसी और आकर्षक पायदान आसानी से मिल जाते हैं। लोग अक्सर अपने घर की सजावट के हिसाब से इनका चयन कर लेते हैं। लेकिन धार्मिक मान्यताओं और वास्तु नियमों के अनुसार, मुख्य द्वार पर हमेशा जूट से बना पायदान रखना ही सबसे उत्तम और शुभ माना गया है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जूट को एक सात्विक और पूरी तरह से प्राकृतिक सामग्री माना जाता है। इसी पवित्रता के कारण प्राचीन काल से ही पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में जूट से बने आसनों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता रहा है। जूट से बने पायदान की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि यह घर के भीतर केवल सकारात्मक ऊर्जा को ही प्रवेश करने देता है और बाहर से आने वाले किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभावों को रोकने या कम करने में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसलिए कृत्रिम चीजों के बजाय प्राकृतिक जूट के पायदान को प्राथमिकता देनी चाहिए।

पायदान का रंग भी बदल सकता है भाग्य

वास्तु शास्त्र में रंगों के चयन को बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, क्योंकि हर रंग की अपनी एक विशेष तरंग और ऊर्जा होती है। पायदान के रंगों के बारे में पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि यदि संभव हो तो जूट के प्राकृतिक भूरे या मिट्टी के रंग का पायदान ही इस्तेमाल करना चाहिए। यह रंग पृथ्वी तत्व से जुड़ा होता है और स्थिरता लाता है।

हालांकि, यदि आप अपने घर के इंटीरियर या सजावट के अनुसार रंगीन पायदान चुनना चाहते हैं, तो हरे रंग को सबसे शुभ और उत्तम माना गया है। हरे रंग से जुड़े कुछ खास पहलू इस प्रकार हैं:

  • प्रकृति और समृद्धि का प्रतीक: हरा रंग सीधे तौर पर प्रकृति, खुशहाली, विकास और नई ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।
  • सकारात्मकता का आकर्षण: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरा रंग सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर तेजी से आकर्षित करता है।
  • ताजगी और स्वच्छता: मुख्य द्वार पर हरा पायदान होने से वहां हमेशा ताजगी, जीवंतता और स्वच्छता का अनुभव होता है।
  • देवी लक्ष्मी का स्वागत: एक साफ-सुथरा, व्यवस्थित और हरे रंग से सजा प्रवेश द्वार धन की देवी मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक माना जाता है, जिससे घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।

आकार का भी रखें विशेष ध्यान: गोल और आयताकार पायदान

वास्तु के नियमों में केवल रंग और सामग्री ही नहीं, बल्कि पायदान का आकार भी बहुत मायने रखता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, पायदान का आकार घर की ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है:

  • आयताकार पायदान (Rectangular Doormat): मुख्य द्वार पर आयताकार आकार का पायदान रखना स्थिरता और संतुलन का प्रतीक है। यह जीवन में सुरक्षा का एहसास कराता है।
  • गोल पायदान (Round Doormat): यदि आपके घर का मुख्य द्वार उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खुलता है, तो वहां गोल आकार का पायदान रखना बेहद शुभ परिणाम देता है। ऐसा माना जाता है कि इन दिशाओं में गोल आकार का पायदान रखने से ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है और घर में हमेशा सुखद वातावरण बना रहता है।

छोटी बातें, बड़े बदलाव

पंडित दीपलाल जयपुरी का कहना है कि आज के आधुनिक समय में लोग अपने घरों को सजाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर देते हैं। वे महंगे-महंगे शोपीस और वॉलपेपर तो ले आते हैं, लेकिन घर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी मुख्य द्वार से जुड़ी इन छोटी और बेहद महत्वपूर्ण बातों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देते हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से घर का प्रवेश द्वार ही वह मुख्य द्वार है, जहां से घर के अंदर शुभ और अशुभ दोनों ही प्रकार की शक्तियों का प्रवेश होता है। इसलिए, मुख्य द्वार पर पायदान जैसी साधारण दिखने वाली वस्तु का चयन भी बहुत सोच-समझकर और वास्तु के नियमों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए ताकि घर में हमेशा शांति, समृद्धि और खुशहाली का वास रहे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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