शिवपुरी में 'सांवरिया जी की नमकीन' का बढ़ता जादू: कोटा से शुरू हुआ स्वाद का सफर, सरकारी योजना से संवरी तस्वीर मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 2
भाटी परिवार की पुश्तैनी नमकीन कला कोटा से होते हुए शिवपुरी पहुंची और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना की मदद से एक लोकप्रिय ब्रांड बन गई। योजना से मिले 10 लाख रुपये के ऋण और 35 प्रतिशत सब्सिडी ने उत्पादन को पांच गुना तक बढ़ा दिया।

शिवपुरी शहर में जब भी बेहतरीन स्वाद और गुणवत्ता की चर्चा होती है, तो लोगों की जुबान पर ‘सांवरिया जी की नमकीन’ का नाम सहज ही आ जाता है। अपनी खास क्वालिटी और पारंपरिक स्वाद के दम पर इस ब्रांड ने आज शहर में एक अलग पहचान कायम कर ली है। मगर इस कामयाबी के पीछे भाटी परिवार की वर्षों की मेहनत, संघर्ष और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हुनर की एक लंबी कहानी छिपी है। इस पारंपरिक कारोबार को आधुनिक रूप देने में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) ने अहम भूमिका निभाई है।

कोटा से शिवपुरी तक पहुंची नमकीन की कला

महेंद्र भाटी बताते हैं कि उनके पिता मूल रूप से राजस्थान के कोटा के रहने वाले थे, जहां उन्होंने नमकीन बनाने का हुनर सीखा। इसके बाद वे मध्य प्रदेश के मोहना आए और वहीं इस कारोबार की नींव रखी। कुछ समय बाद पूरा परिवार शिवपुरी आ बसा और यहीं इस पुश्तैनी व्यवसाय को आगे बढ़ाया गया। आज महेंद्र भाटी और उनके छोटे भाई अजय भाटी मिलकर इस कारोबार की कमान संभाल रहे हैं। दोनों भाइयों ने अपने पिता की विरासत को नई सोच के साथ आगे बढ़ाते हुए इसे शहर के लोकप्रिय ब्रांडों की कतार में खड़ा कर दिया है।

लकड़ी की भट्टी और धुएं के बीच कटते थे शुरुआती दिन

कारोबार के शुरुआती दिन बेहद कठिन रहे। उस दौर में लकड़ी की भट्टियों पर नमकीन बनाई जाती थी, जिससे खूब धुआं उठता था। बेसन गूंथने से लेकर नमकीन तैयार करने तक का सारा काम हाथ से ही होता था। महेंद्र भाटी के मुताबिक, दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद भी उत्पादन सीमित ही रहता था और शारीरिक श्रम काफी ज्यादा करना पड़ता था। धुएं और गर्मी के बीच काम करना आसान नहीं था, फिर भी परिवार ने कभी हार नहीं मानी।

PMFME योजना बनी विस्तार की बुनियाद

कारोबार में बड़ा मोड़ तब आया, जब उद्योग विभाग के जरिए परिवार को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के बारे में जानकारी मिली। योजना के तहत आवेदन करने पर उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इतना ही नहीं, इस योजना के अंतर्गत उन्हें 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी का लाभ भी मिला, जिससे आधुनिक मशीनरी खरीदना आसान हो गया। सरकारी मदद ने उनके छोटे उद्योग को एक नई दिशा दे दी।

आधुनिक मशीनों से उत्पादन हुआ पांच गुना

ऋण और सब्सिडी की मदद से भाटी परिवार ने अपने उत्पादन केंद्र को आधुनिक बनाया। नई भट्टी, बड़े भगोने और बेसन गूंथने की ऑटोमैटिक मशीन लगाई गई। महेंद्र भाटी कहते हैं कि मशीनों के इस्तेमाल से न सिर्फ मेहनत कम हुई, बल्कि उत्पादन क्षमता में भी जबरदस्त इजाफा हुआ। पहले जहां पूरे दिन में करीब 20 किलो नमकीन ही बन पाती थी, वहीं अब रोजाना एक क्विंटल से ज्यादा नमकीन तैयार की जा रही है। इससे समय की बचत, लागत में कमी और गुणवत्ता में सुधार साफ नजर आ रहा है।

गुणवत्ता ही बनी सबसे बड़ी ताकत

भाटी परिवार का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी पूंजी नमकीन की गुणवत्ता है। वे अपने उत्पादों की शुद्धता और स्वाद के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करते। यही वजह है कि उनकी दुकान पर ग्राहकों की भीड़ लगातार बनी रहती है। फिलहाल ‘सांवरिया जी की नमकीन’ का संचालन शिवपुरी स्थित अपने आउटलेट से ही किया जा रहा है। बाहर सप्लाई करने के बजाय वे ग्राहकों को सीधे अपनी दुकान से ही उत्पाद उपलब्ध कराते हैं और अधिकांश माल वहीं बिक जाता है।

छोटे उद्यमियों के लिए प्रेरणा

महेंद्र और अजय भाटी मानते हैं कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना जैसे प्रयास छोटे उद्यमियों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। सरकारी सहायता और आधुनिक तकनीक के मेल से स्थानीय कारोबार न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा कर रहे हैं। सांवरिया जी की नमकीन की यह कहानी बताती है कि पारंपरिक हुनर, मेहनत और सही समय पर मिली सरकारी मदद किसी भी छोटे व्यवसाय को नई बुलंदियों तक पहुंचा सकती है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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