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एक घंटा पहले
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छापेमारी में पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस ने एक ऐसी छापेमारी की, जिसके खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। पुलिस ने मोहम्मद बाजार इलाके में मीनार मंडल के आवास पर दबिश देकर भारी मात्रा में नकदी और सोने के जेवरात बरामद किए हैं। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने 35 बोरियों में भरे हुए 28.5 करोड़ रुपये नकद और 15 किलो सोना जब्त किया है। बरामद किए गए सोने की बाजार में अनुमानित कीमत करीब 21 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस तरह कुल बरामदगी का आंकड़ा 50 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए पुलिस टीम ने करीब 24 घंटे का समय लिया, जिसके बाद इस छिपे हुए खजाने का राज उजागर हो सका।
कैसे खुला काले धन का यह राज
इस पूरे मामले की शुरुआत एक आपराधिक जांच के दौरान हुई। पुलिस ने मंगलवार को मोहम्मद बाजार क्षेत्र से कुछ डकैतों को गिरफ्तार किया था। ये अपराधी झारखंड के दुमका और पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय थे। पुलिस की पूछताछ के दौरान इन डकैतों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण सुराग दिया, जिसने पुलिस को सीधे मीनार मंडल के घर तक पहुंचा दिया। जानकारी मिलते ही बीरभूम पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया और आरोपी के घर की घेराबंदी कर ली। पुलिस अधीक्षक ने आधिकारिक तौर पर इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोने की बरामदगी की पुष्टि की है।
कौन है मीनार मंडल और क्या है उसका कनेक्शन
मीनार मंडल की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प और चौंकाने वाली है। वह कभी राज्य परिवहन निगम में एक सामान्य बस ड्राइवर के तौर पर काम करता था। समय के साथ उसने अपने संबंध विकसित किए और वह पत्थर कारोबारी तुलु मंडल का मैनेजर बन गया। उल्लेखनीय है कि मीनार मंडल, तुलु मंडल का बहनोई भी है। तुलु मंडल का नाम पहले भी अवैध पत्थर खनन जैसे गंभीर मामलों में सामने आ चुका है और उसे टीएमसी के पूर्व नेता अनुब्रत मंडल का बेहद करीबी सहयोगी माना जाता है। बस ड्राइवर से सीधे करोड़ों के खजाने का मालिक बनने तक का मीनार मंडल का यह सफर अब जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है।
पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ की प्रक्रिया
छापेमारी के बाद स्थिति इतनी गंभीर थी कि पुलिस को नोटों की गिनती के लिए बैंक से विशेष मशीनें मंगवानी पड़ीं। बुधवार दोपहर को शुरू हुई यह गिनती गुरुवार सुबह तक जारी रही। पूछताछ के शुरुआती दौर में मीनार मंडल लगातार पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा और गोलमोल जवाब देता रहा। हालांकि, बाद में उसने स्वीकार कर लिया कि यह पैसा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक विशाल आपराधिक सिंडिकेट का है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और सूरी स्थित जिला अदालत में पेश किया है। अब पुलिस मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए उसकी रिमांड की मांग कर रही है। यह नकदी अवैध रूप से किए गए पत्थर और बालू के कारोबार से जुड़ी हुई बताई जा रही है।
जांच में ईडी की एंट्री से बढ़ेगी मुश्किलें
इस बड़े खुलासे के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी भी सक्रिय हो गई है। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना मिलने से साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह एक संगठित मनी लॉन्ड्रिंग का मामला हो सकता है। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क के मनी ट्रेल की बारीकी से जांच कर रही है। चूंकि तुलु मंडल का नाम अनुब्रत मंडल से जोड़ा जा रहा है, जो पहले ही पशु तस्करी मामले में केंद्रीय एजेंसियों के घेरे में हैं, इसलिए इस केस का राजनीतिक कनेक्शन भी बेहद गहरा माना जा रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस खजाने का वास्तविक मालिक कौन है और क्या यह पैसा किसी बड़े राजनेता के काले धन का हिस्सा है। इस कार्रवाई के बाद से बंगाल के राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है और आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। पुलिस और ईडी के संयुक्त प्रयासों से इस सिंडिकेट के हर एक सदस्य की संपत्ति और बैंक खातों की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
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