हिमाचल प्रदेश में फिर डरावनी स्थिति में कोटरोपी की पहाड़ियां, मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे पर बढ़ी मुश्किलें हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 4
हिमाचल प्रदेश के मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे पर कोटरोपी की पहाड़ियों के फिर से धंसने से दहशत का माहौल है। प्रशासन ने करीब डेढ़ दिन की मशक्कत के बाद यातायात को बहाल किया है, लेकिन भूस्खलन का खतरा अब भी बना हुआ है।

कोटरोपी में फिर गहराया भूस्खलन का संकट

हिमाचल प्रदेश में सामरिक महत्व रखने वाले मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे संख्या 154 पर स्थिति एक बार फिर से चिंताजनक हो गई है। पधर उपमंडल के अंतर्गत आने वाले कोटरोपी क्षेत्र में पहाड़ियां एक बार फिर से धंसने लगी हैं। करीब 12 साल बाद कोटरोपी की पहाड़ियों के सक्रिय होने से स्थानीय प्रशासन और आम जनता की चिंताएं बढ़ गई हैं। हाल ही में हुए भूस्खलन के कारण निर्माणाधीन हाईवे का एक हिस्सा जमीन में धंस गया है और सड़क पर बनी नई पुलिया भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है।

प्रशासन की मशक्कत और यातायात बहाली

पहाड़ से हुए भूस्खलन के बाद स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय प्रशासन ने युद्ध स्तर पर कार्य किया। करीब डेढ़ दिन की कड़ी मेहनत और प्रयासों के बाद प्रशासन ने इस नेशनल हाईवे को सभी प्रकार के वाहनों के लिए दोबारा खोल दिया है। पधर के एसडीएम सुरजीत सिंह, जो घटना के बाद से ही मौके पर डटे हुए हैं, ने जानकारी दी कि लैंडस्लाइड के तुरंत बाद सुरक्षा के मद्देनजर केवल छोटे वाहनों को ही वहां से गुजरने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, बाद में एक अस्थायी रैंप का निर्माण किया गया, जिसके माध्यम से अब भारी वाहनों की आवाजाही भी बहाल कर दी गई है।

सुरक्षा को लेकर प्रशासन की चेतावनी

एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में हाईवे को केवल अस्थायी तौर पर खोला गया है। यदि आने वाले समय में मौसम और अधिक खराब होता है और भूस्खलन की प्रक्रिया नहीं रुकती है, तो सुरक्षा के दृष्टिगत हाईवे को पुनः बंद करना पड़ सकता है। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे इस संवेदनशील क्षेत्र से गुजरते समय विशेष सावधानी बरतें। मंडी के एसपी विनोद कुमार ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घटनास्थल पर पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके और यातायात को सुचारू रूप से नियंत्रित किया जा सके।

खौफनाक यादें और पुराना इतिहास

कोटरोपी की पहाड़ियों का यह भूस्खलन स्थानीय लोगों के लिए साल 2014 की उन खौफनाक यादों को ताजा कर गया है, जब 12-13 अगस्त की रात को पूरी पहाड़ी दरक गई थी। उस भीषण त्रासदी में 2 एचआरटीसी की बसें मलबे की चपेट में आ गई थीं, जिससे कुल 48 लोगों की अकाल मौत हो गई थी। उस दौरान कई दिनों तक निरंतर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था, लेकिन विडंबना यह है कि आज भी 3 शव मलबे से बरामद नहीं हो सके हैं। यह मार्ग मंडी को धर्मशाला, कांगड़ा और पठानकोट से जोड़ने वाली एक प्रमुख कड़ी है, इसलिए यहां दोबारा पहाड़ धंसने की खबरों ने शासन और प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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