हिमाचल प्रदेश
एक घंटा पहले
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हिमाचल प्रदेश में लंबे अंतराल के बाद लॉटरी व्यवस्था की वापसी होने जा रही है। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी विनियमन नियम-2026 को मंजूरी दे दी है और इससे जुड़ी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। बताया जा रहा है कि करीब 25 साल पहले प्रदेश में लॉटरी सिस्टम पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब राजस्व बढ़ाने के मकसद से इसे दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया गया है।
नियम ट्रेजरी, लेखा और लॉटरी निदेशालय की ओर से तैयार किए गए हैं और पूरी व्यवस्था की निगरानी सीधे सरकार करेगी। इसके लिए शिमला में एक कार्यालय खोला जाएगा। लॉटरी का टिकट 2 रुपये से शुरू होगा और किसी भी स्कीम में पहला इनाम 10,000 रुपये से अधिक ही रखा जाएगा।
लॉटरी सिस्टम के मुख्य नियम
नए प्रावधानों के तहत रात 9 बजे के बाद किसी भी ड्रॉ की अनुमति नहीं होगी। एक दिन में सभी स्कीमों को मिलाकर अधिकतम 24 ड्रॉ ही निकाले जा सकेंगे, जबकि पूरे साल में केवल 6 विशेष बंपर ड्रॉ निकलेंगे, जिनमें करोड़ों रुपये का इनाम होगा। इस तरह की बड़ी लॉटरी साल में केवल छह बार ही आयोजित की जाएगी।
राष्ट्रीय अवकाश के दिन कोई ड्रॉ आयोजित नहीं होगा। राष्ट्रीय त्योहारों और अवकाश के दिनों में लॉटरी की प्रक्रिया पूरी तरह बंद रहेगी।
टिकट पर सुरक्षा और पहचान
हर टिकट पर राज्य सरकार का लोगो, निदेशक के डिजिटल हस्ताक्षर, बारकोड, क्यूआर कोड और छपाई का सटीक समय दर्ज होगा। फिजिकल टिकटों पर बड़े अक्षरों में लिखा होगा— फॉर सेल इन हिमाचल प्रदेश ऑनली।
वित्त विभाग ने ड्राफ्ट में साप्ताहिक, मासिक और बंपर ड्रॉ तीनों के विकल्प रखे हैं। टिकट की कीमत 10 से 500 रुपये तक हो सकती है और इनाम की राशि एक लाख से पांच करोड़ तक रखने का प्रस्ताव है। हालांकि लॉटरी का साइज, ड्रॉ की फ्रीक्वेंसी और टिकट की दर पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री लगाएंगे।
फर्जीवाड़ा रोकने के सख्त इंतजाम
नकली टिकटों के कारोबार पर लगाम कसने के लिए सरकार ने कड़े सुरक्षा प्रावधान किए हैं। ऑनलाइन लॉटरी का मुख्य सेंट्रल कंप्यूटर सर्वर राज्य की सीमा के भीतर ही रहेगा, जबकि इसका मिरर सर्वर सीधे शिमला निदेशालय में लगाया जाएगा, जहां से अधिकारी हर पल की लाइव मॉनिटरिंग करेंगे।
ड्रॉ की निगरानी और संचालन के लिए नियमित आधार पर न्यायाधीशों की नियुक्ति होगी। इस तरह नियुक्त न्यायाधीशों को नामित प्राधिकारी की ओर से समय-समय पर निर्धारित मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
निर्णायकों की जवाबदेही
लॉटरी का परिणाम निकालने वाले निर्णायकों, यानी प्रथम और द्वितीय श्रेणी के राजपत्रित अधिकारियों, की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि किसी रिजल्ट में उनके किसी सगे-संबंधी का लॉटरी के किसी डिस्ट्रीब्यूटर, सब-डिस्ट्रीब्यूटर या रिटेलर के साथ व्यावसायिक या वित्तीय संबंध सामने आता है, तो उन्हें ड्रॉ की प्रक्रिया से अलग रहना होगा। ड्यूटी से पहले सभी को नो कॉन्फ्लिक्ट का हलफनामा देना अनिवार्य होगा।
कब निकलेगा पहला ड्रॉ
नियमों के अनुसार टेंडर मिलने और एग्रीमेंट साइन होने के 60 दिनों के भीतर पहला ड्रॉ कराना अनिवार्य होगा। लॉटरी ऑफलाइन यानी पेपर रूप में और मोबाइल ऐप व वेबसाइट के जरिये ऑनलाइन, दोनों फॉर्मेट में उपलब्ध रहेगी।
बताया जा रहा है कि इसी हफ्ते कैबिनेट बैठक में लॉटरी नियमों पर चर्चा होने के आसार हैं। मंजूरी मिलते ही 60 दिन के भीतर पहला ड्रॉ निकालने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए सरकार टेंडर जारी करेगी। सरकार ने लॉटरी से सालाना करीब 100 करोड़ रुपये आय का लक्ष्य तय किया है।
धूमल सरकार में लगी थी रोक
हिमाचल प्रदेश में 1998 से पहले लॉटरी सिस्टम लागू था। लेकिन 1996 में सोलन के रहने वाले एक कांग्रेस नेता ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी और मांग की थी कि लॉटरी को बंद किया जाए, क्योंकि इससे लोगों के घर बर्बाद हो रहे थे।
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