मक्के की बुआई से पहले करें बीज उपचार, बढ़ेगी पैदावार — सुनिए पलामू के कृषि वैज्ञानिक की राय झारखंड एक घंटा पहले 2
पलामू में खरीफ सीजन की मक्का बुआई शुरू हो गई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे ने कार्बेन्डाजिम, राइस वाटर और सीड ड्रम के जरिए बीज उपचार की सलाह दी है, जिससे रोग कम और उत्पादन अधिक होता है।

पलामू में खरीफ सीजन के साथ ही मक्के की बुआई का दौर शुरू हो चुका है। मक्का किसानों के लिए यह समय खास अहमियत रखता है, क्योंकि अच्छी फसल की बुनियाद बुआई से पहले ही तैयार हो जाती है। अगर किसान बीजों का उपचार करके बुआई करें तो फसल को शुरुआती रोगों से बचाया जा सकता है और पैदावार में भी बढ़ोतरी होती है। दरअसल बीज उपचार को फसलों का टीकाकरण ही माना जाता है, जो बीजों को बीमारियों से सुरक्षा देता है।

बीज उपचार क्यों है जरूरी

कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे के अनुसार, जैसे नवजात शिशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए टीका लगाया जाता है, ठीक उसी तरह बीजों को भी रोगों से सुरक्षित रखने के लिए उपचारित करना आवश्यक होता है। बीज उपचार से बीज जनित रोगों का खतरा घट जाता है और अंकुरण क्षमता बेहतर होती है। इसका असर यह होता है कि पौधे स्वस्थ रहते हैं और फसल की शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है।

कार्बेन्डाजिम से बीज उपचार

कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि मक्के की खेती करने वाले किसान कार्बेन्डाजिम दवा की मदद से बीज उपचार कर सकते हैं। इसके लिए प्रति किलो बीज में 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम पाउडर मिलाना चाहिए। तय मात्रा में दवा को बीज के साथ अच्छी तरह मिलाने के बाद उसे छायादार जगह पर करीब आधे घंटे तक छोड़ देना चाहिए। इसके बाद बीज बुआई के लिए तैयार हो जाता है।

राइस वाटर विधि भी कारगर

डॉ. पांडे ने आगे कहा कि किसान चाहें तो राइस वाटर यानी मांड या हल्के पानी की मदद से भी बीज उपचार कर सकते हैं। इसके लिए पानी में निर्धारित मात्रा में रासायनिक दवा मिलाकर उसे धीरे-धीरे बीज पर छिड़कें और अच्छी तरह मिला लें। ऐसा करने से दवा बीज की पूरी सतह पर चिपक जाती है और रोगों से बेहतर बचाव मिलता है।

सीड ड्रम तकनीक से आसान होगा काम

बड़े स्तर पर खेती करने वाले किसानों के लिए सीड ड्रम तकनीक उपयोगी साबित होती है। इसमें बीज को ड्रम में डालकर जरूरी मात्रा में रसायन मिलाया जाता है और फिर ड्रम को घुमाया जाता है, जिससे दवा सभी बीजों पर एक समान रूप से लग जाती है। उपचार के बाद प्रति 2 ग्राम दवा के साथ करीब 10 ग्राम महीन राख भी मिलाई जा सकती है, ताकि दवा बीज पर अच्छी तरह टिकी रहे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि बीज उपचार भले ही एक छोटी प्रक्रिया हो, लेकिन इसका फायदा पूरे सीजन भर मिलता है। इसलिए मक्के की बुआई से पहले बीजों का उपचार जरूर करें, जिससे फसल रोगमुक्त रहे और बेहतर उत्पादन हासिल हो सके।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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