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एक घंटा पहले
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की बड़ी उपलब्धि
ग्लासगो में आयोजित हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलीटों का दबदबा कायम है। इसी क्रम में मणिपुर की प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर बिंद्यारानी देवी ने महिलाओं के 58 किलोग्राम भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है। कॉमनवेल्थ गेम्स के मौजूदा संस्करण में यह भारत की ओर से जीता गया छठा पदक है, जबकि वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में यह भारत का पांचवां पदक है। बिंद्यारानी ने लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर अपनी निरंतरता साबित की है।
199 किलोग्राम का कुल भार और ब्रॉन्ज मेडल
27 वर्षीय बिंद्यारानी ने पदक जीतने की राह में स्नैच और क्लीन एंड जर्क इवेंट्स में जबरदस्त कौशल दिखाया। उन्होंने स्नैच राउंड में 84 किलोग्राम और 85 किलोग्राम के भार को सफलतापूर्वक पार किया। अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने 87 किलोग्राम वजन उठाकर एक ठोस आधार तैयार कर लिया था। इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में उन्होंने 110 किलोग्राम का सफल भार उठाया। हालांकि, उनका पहला प्रयास असफल रहा था, लेकिन दूसरे प्रयास में 112 किलोग्राम का वजन उठाकर उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल पर अपना कब्जा सुनिश्चित कर लिया। उन्होंने तीसरे प्रयास में 116 किलोग्राम वजन उठाने का प्रयास किया, जिसमें उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन तब तक वह पदक की दौड़ में तीसरा स्थान सुरक्षित कर चुकी थीं।
नाइजीरियाई एथलीट का नया कीर्तिमान
इस मुकाबले में स्वर्ण पदक नाइजीरिया की रफियातु फोलाशाडे ने जीता। उन्होंने पूरे खेल के दौरान बेहतरीन तकनीक का प्रदर्शन करते हुए स्नैच में 103 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम भार उठाया। इसके साथ ही उन्होंने कुल 229 किलोग्राम वजन के साथ एक नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी स्थापित किया। उन्होंने रजत पदक विजेता कनाडा की एन सोफी टाशेरो को 14 किलोग्राम के बड़े अंतर से मात दी, जिन्होंने कुल 215 किलोग्राम भार उठाया था।
बिंद्यारानी का संघर्ष और शानदार वापसी
मूल रूप से इंफाल की रहने वाली बिंद्यारानी भारतीय भारोत्तोलन की एक बेहद विश्वसनीय खिलाड़ी मानी जाती हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में सिल्वर मेडल जीता था और इसी वर्ष नेशनल चैंपियन बनने का गौरव भी हासिल किया। वर्ष 2025 की नेशनल चैंपियनशिप के दौरान उन्होंने 88 किलोग्राम स्नैच में नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया था। 55 किलोग्राम और 58 किलोग्राम भारवर्ग के बीच बदलाव के चुनौतीपूर्ण दौर में साल 2023 में उन्हें घुटने की गंभीर चोट का सामना करना पड़ा था। लंबी चोट और रिकवरी के बावजूद उन्होंने जिस तरह से वापसी की है, वह प्रेरणादायक है। लगातार दो बार कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी पूरी क्षमता के साथ मैदान पर वापस लौट आई हैं।
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