धान की खेती में मताई का महत्व: बंपर पैदावार के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स छत्तीसगढ़ 35 मिनट पहले 3
धान की रोपाई से पहले खेत की मताई करना फसल की सफलता के लिए अनिवार्य है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और पौधों का विकास बेहतर होता है।

खेती की तैयारी और पैदावार का सीधा संबंध

धान की खेती में मताई या पडलिंग की प्रक्रिया महज एक कृषि कार्य नहीं है, बल्कि इसे फसल की बंपर पैदावार सुनिश्चित करने की आधारशिला माना जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के विशेषज्ञ डॉ एआर गौर के अनुसार, यदि किसान रोपाई से पूर्व अपने खेतों की वैज्ञानिक तरीके से मताई नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर फसल की गुणवत्ता और अंत में मिलने वाले उत्पादन पर पड़ता है। कई किसान जल्दबाजी में इस चरण को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में नुकसान का कारण बनता है।

रोटावेटर का सही इस्तेमाल

डॉ एआर गौर ने स्पष्ट किया है कि धान की रोपाई शुरू करने से पहले खेत की मताई करना बहुत जरूरी है। मताई के बाद खेत में रोटावेटर का उपयोग करना अनिवार्य होना चाहिए। जब किसान रोटावेटर चलाते हैं, तो खेत में मौजूद अनावश्यक घास और खरपतवार पूरी तरह से कटकर मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाते हैं। कुछ दिनों के अंतराल के बाद, यही खरपतवार मिट्टी में सड़कर कार्बनिक पदार्थ यानी ऑर्गेनिक मैटर में परिवर्तित हो जाते हैं। यह प्रक्रिया मिट्टी के लिए प्राकृतिक पोषण का सबसे बेहतरीन स्रोत साबित होती है।

मिट्टी में जीवांश की बढ़ती मात्रा

खेत में कार्बनिक पदार्थ बनने से मिट्टी के भीतर जीवांश की मात्रा में काफी वृद्धि होती है। जब खेत की मिट्टी में जीवांश का स्तर बढ़ता है, तो उसकी कुल उर्वरता में सुधार देखने को मिलता है। इससे मिट्टी में मौजूद पोटाश और फास्फोरस जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व अधिक घुलनशील हो जाते हैं। इन तत्वों के घुलनशील होने से धान के पौधों की जड़ें उन्हें आसानी से ग्रहण करने में सक्षम हो जाती हैं। नतीजतन, धान के पौधों की शुरुआती बढ़वार न केवल तेज होती है, बल्कि पौधे भी पूरी तरह स्वस्थ बने रहते हैं।

खरपतवार नियंत्रण का बड़ा लाभ

खेत की मताई का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ खरपतवार का शुरुआती दौर में ही नियंत्रण होना है। यदि किसान खरपतवार को समय रहते मिट्टी में नहीं मिलाते हैं, तो ये धान की मुख्य फसल के साथ पोषक तत्वों, पानी और सूरज की रोशनी के लिए प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं। यह प्रतिस्पर्धा फसल को कमजोर कर देती है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए, मताई के माध्यम से खरपतवार का प्रबंधन करना फसल की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

किसानों के लिए विशेषज्ञ सलाह

डॉ एआर गौर ने किसानों को सुझाव दिया है कि रोपा लगाने से ठीक एक दिन पहले मताई का काम पूरी तरह संपन्न कर लें। इससे मिट्टी बुवाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है और रोपाई के दौरान पौधों की जड़ें मिट्टी में आसानी से स्थापित हो जाती हैं। विशेषज्ञ का मानना है कि खेत की तैयारी के समय किया गया निवेश और दी गई थोड़ी सी अतिरिक्त मेहनत आगे चलकर फसल की लागत कम करने और बेहतर उत्पादन देने में किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ पहुँचाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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