संसद में अखिलेश यादव का जोरदार हमला, बोले- जो चढ़ावे की चोरी नहीं रोक पाए, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे? भारत एक घंटा पहले 5
लोकसभा में पेपर लीक रोकने से संबंधित संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली और नीयत पर गंभीर सवाल उठाए।

सरकार पर तीखे सवाल

नई दिल्ली में लोकसभा के भीतर पेपर लीक की घटनाओं को रोकने के लिए लाए गए संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुंचे, तो वहां मौजूद एनडीए सांसदों ने जिस तरह उनका स्वागत किया, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार के भीतर कितनी बड़ी घबराहट थी। अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि एक 'प्रधान' को हटाकर वास्तव में प्रधानमंत्री को बचाया गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग मंदिरों में भगवान को चढ़ने वाले दान और चंदे की चोरी को रोकने में नाकाम रहे, उनसे पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं को रोकने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

युवाओं के आक्रोश और सरकार के झुकने पर टिप्पणी

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है, तब से देश में शिक्षा, परीक्षाओं और विश्वविद्यालय प्रणालियों को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर चीज को एक समान बनाने की कोशिशों के कारण युवाओं में असंतोष की भावना लगातार बढ़ रही थी। नीट की परीक्षा के विवाद के बाद छात्रों ने न केवल सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया, बल्कि उन्हें अपने परिवारों का भी व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। यही वजह है कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कहलाने वाली बीजेपी को अंततः झुकना पड़ा। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में ही 20 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। अखिलेश का तर्क है कि सरकार का रुख केवल इसलिए बदला क्योंकि उसके अपने सांसद भी सरकार की स्थिरता को लेकर आशंकित होने लगे थे।

किरेन रिजिजू के साथ बहस

सदन में अखिलेश के तीखे प्रहारों का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पूछा कि क्या यह बेहतर नहीं है कि सरकार छात्रों की आवाज सुनकर संसद में नया कानून लेकर आई है, बजाय इसके कि विरोध को दबाने के लिए आपातकाल लगा दिया जाए। इस पर पलटवार करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कानून बनाना ही एकमात्र समाधान नहीं है, असल समस्या सरकार की नीयत में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस दिन सरकार की नीयत साफ होगी, उसी दिन परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगी। सपा नेता ने दोहराया कि इमरजेंसी के दौर के बाद भी देश में बड़ा राजनीतिक बदलाव आया था और वैसा ही परिवर्तन अब फिर से देखने को मिलेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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