बिहार
एक घंटा पहले
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क्रिकेट के मैदान पर तेजी से चमक रहे युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी इन दिनों खूब सुर्खियों में हैं। आईपीएल में दमदार प्रदर्शन ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी है। बिहार के इस उभरते सितारे की पहचान अब अपने राज्य की सीमा से बाहर निकलकर पूरे देश और विदेशों तक फैल चुकी है। यही वजह रही कि जब वह अपने पैतृक घर लौटे, तो हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल था कि इतना बड़ा सितारा आखिर अपने घर पर कितनी देर ठहरा।
घर के बाहर उमड़ी प्रशंसकों की भीड़
वैभव सूर्यवंशी के समस्तीपुर पहुंचने की खबर जैसे ही फैली, उनके घर के बाहर लोगों का हुजूम जुट गया। 2 जून की शाम से ही आने-जाने वालों का सिलसिला तेज हो गया था और हालात ऐसे बने कि भीड़ को संभालना कठिन हो गया। स्थानीय लोग, प्रशंसक, शुभचिंतक और कई जाने-माने लोग उनसे मिलने के लिए पहुंचने लगे। इसी कारण उन्हें सीधे घर ले जाने के बजाय पहले एक गुप्त स्थान पर ठहराया गया।
रातभर सुरक्षित ठिकाने पर रुके
सूत्रों के अनुसार, वैभव 2 जून को ही अपने जिले में आ गए थे, लेकिन उमड़ती भीड़ को देखते हुए उन्हें रातभर समस्तीपुर शहर में ही एक सुरक्षित जगह पर रखा गया। यह निर्णय पूरी तरह सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या भगदड़ जैसी स्थिति से बचा जा सके। इस मामले को लेकर परिवार और प्रशासन, दोनों ही सतर्क थे।
तड़के 4 बजे पहुंचे पुश्तैनी घर
अगली सुबह करीब 4 बजे, जब भीड़ कुछ कम हुई, तब उन्हें ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर स्थित उनके पुश्तैनी घर लाया गया। घर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले अपनी मां के हाथ का बना खाना खाया और दादी से आशीर्वाद लिया। लंबे अरसे बाद अपने परिवार के बीच लौटने के कारण यह पल उनके लिए बेहद खास और भावुक करने वाला रहा।
कुछ घंटों में ही पटना के लिए रवाना
हालांकि वैभव अपने घर पर ज्यादा देर नहीं ठहर सके। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, घर के बाहर फिर से लोगों का जमावड़ा बढ़ने लगा और सेल्फी लेने वालों की लंबी कतार लग गई। हालात इतने बिगड़ने लगे कि उन्हें महज 6 से 7 घंटे के भीतर ही वहां से निकलना पड़ा। भीड़ पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था, इसी वजह से उन्हें उसी दिन पटना के लिए रवाना कर दिया गया।
नेताओं और गणमान्य लोगों ने किया सम्मानित
वैभव के घर स्थानीय नेताओं, पूर्व विधायक अख्तरुल इस्लाम, डॉक्टरों, शिक्षाविदों और व्यापारियों के पहुंचने का तांता लगा रहा। सभी ने उन्हें फूलमाला और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान दिया। वहीं परिवार की ओर से मीडिया के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए वीडियो बनाने वालों को भी मना किया जा रहा था।
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