फाइबर, आयरन और कैल्शियम का खजाना: थकान मिटाए और पाचन सुधारे यह देसी सब्जी, स्वाद ऐसा कि नॉनवेज भूल जाएंगे जीवनशैली एक घंटा पहले 3
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक सब्जी जिमी कांदा, जिसे सुरन या ओल भी कहते हैं, गर्मियों में स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन मेल मानी जाती है। देसी मसालों में बनी इसकी रेसिपी का स्वाद चखने के बाद लोग नॉनवेज तक भूल जाते हैं।

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई में जिमी कांदा का अपना खास स्थान है। कई जगहों पर इसे सुरन या ओल के नाम से भी जाना जाता है। स्वाद और पौष्टिकता से भरपूर यह देसी सब्जी अब गर्मियों के मौसम में भी लोगों की पसंदीदा बनती जा रही है। ग्रामीण इलाकों में ऐसी मान्यता है कि यह शरीर को भीतर से ठंडक देती है, पाचन को दुरुस्त रखती है और गर्मी से होने वाली तकलीफों में राहत पहुंचाती है। यही कारण है कि गांवों में इसे मसालेदार सब्जी, भुजिया और कई देसी तरीकों से बनाकर गर्मियों के भोजन का हिस्सा बनाया जाता है।

सेहत से भरपूर देसी विकल्प

जिमी कांदा फाइबर, आयरन, कैल्शियम और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार गर्मी के दिनों में इसका सेवन शरीर को संतुलित बनाए रखने और थकान घटाने में मददगार होता है। यह पाचन को बेहतर रखने के साथ-साथ पेट से जुड़ी समस्याओं में भी फायदेमंद माना जाता है। जब तेज गर्मी में लोग हल्के और पौष्टिक भोजन की तलाश करते हैं, तब जिमी कांदा एक बढ़िया विकल्प साबित होता है।

पारंपरिक स्वाद वाली देसी रेसिपी

जिमी कांदा की सब्जी बनाने के लिए पहले इसे छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इसके बाद हल्दी मिले पानी में उबालकर इसकी खुजली कम की जाती है और फिर इसे सुनहरा होने तक तला जाता है। अगले चरण में कढ़ाई में तेल गर्म करके प्याज, टमाटर, अदरक-लहसुन और देसी मसालों का तड़का लगाया जाता है। मसाले अच्छी तरह पक जाने के बाद उबला हुआ जिमी कांदा डालकर धीमी आंच पर भूना जाता है। ऊपर से हरा धनिया डालने पर इसका स्वाद और भी निखर जाता है।

चावल और रोटी दोनों के साथ बेजोड़

जिमी कांदा की सब्जी गरम चावल, दाल या रोटी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है। कई लोग इसे दही या रायते के साथ खाना पसंद करते हैं, जिससे यह संतुलित और हल्का भोजन बन जाता है। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में गर्मियों के दौरान आज भी यह पारंपरिक व्यंजन खास पसंदीदा माना जाता है।

गर्मी में सेहत का देसी खजाना

छत्तीसगढ़ की देसी रसोई में जिमी कांदा महज एक सब्जी नहीं, बल्कि पारंपरिक खानपान की पहचान भी है। बदलते दौर में जब लोग दोबारा पौष्टिक और देसी भोजन की ओर लौट रहे हैं, तब जिमी कांदा की सब्जी स्वाद के साथ सेहत का भी शानदार विकल्प बनकर उभर रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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