जीवनशैली
8 घंटे पहले
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त्योहारी सीजन में मिठास भरे सीतामढ़ी की बालूशाही
इस दिवाली अगर आप बाजार की मिलावटी मिठाइयों से दूर शुद्ध और कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो बिहार के सीतामढ़ी की मशहूर बालूशाही एक बेहतरीन विकल्प है। स्थानीय हलवाई अरुण साह के अनुसार, सीतामढ़ी में पसंद की जाने वाली इस मिठाई की सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने की अनूठी विधि है। इसे बनाने के लिए तेल या रिफाइंड का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि इसे सीधे चाशनी में ही पकाया जाता है। आप भी इस आसान विधि का पालन करके मात्र 15 मिनट में स्वादिष्ट और खस्ता बालूशाही घर पर तैयार कर सकते हैं।
छेना तैयार करने की विधि
हलवाई अरुण साह ने बताया कि बालूशाही की शुद्धता इसके मुख्य आधार यानी छेना पर निर्भर करती है। सबसे पहले शुद्ध भैंस का दूध लें और उसे अच्छी तरह उबालें। जब दूध उबल जाए, तो उसे पुराने खट्टे पानी (छेना का पानी) का उपयोग करके फाड़ लें। जब छेना हल्का गुनगुना रह जाए, तो उसे एक साफ सूती कपड़े में डालकर अच्छी तरह छान लें ताकि सारा अतिरिक्त पानी निकल जाए। यह प्रक्रिया मिठाई के स्वाद और बनावट को बेहतर बनाने के लिए अनिवार्य है।
सही अनुपात और मिश्रण का महत्व
छेना तैयार हो जाने के बाद, बारी आती है इसके बेस को तैयार करने की। अरुण साह के अनुसार, एक बार में लगभग तीन किलो छेना का उपयोग किया जाता है। इसमें डेढ़ किलो सूजी, एक चुटकी बेकिंग सोडा और थोड़ी सी चीनी मिलाई जाती है। इस मिश्रण को अपने हाथों से बहुत अच्छी तरह से मथना और मिलाना चाहिए ताकि सभी सामग्री आपस में एकसार हो जाएं। जब मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाए, तो हाथों की मदद से इसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यही गोलियां आगे चलकर बालूशाही का आकार लेती हैं।
बिना तेल या घी के पकने की अनोखी तकनीक
इस रेसिपी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे तलने की आवश्यकता नहीं होती। बालूशाही को सीधे चीनी और पानी से तैयार की गई चाशनी में पकाया जाता है। चाशनी को मध्यम आंच पर रखें, यह न तो बहुत गाढ़ी होनी चाहिए और न ही बहुत पतली। जब चाशनी मध्यम ताव पर हो, तब तैयार की गई गोलियों को उसमें डाल दें। पकाने के दौरान आवश्यकता के अनुसार थोड़ा-थोड़ा पानी भी डाला जा सकता है।
केवल 15 मिनट में तैयार
चाशनी की मध्यम आंच और लगातार पकने की प्रक्रिया के कारण, बालूशाही बहुत जल्दी तैयार हो जाती है। मात्र 15 मिनट के भीतर बालूशाही पूरी तरह से पक जाती है और चाशनी को अंदर तक सोख लेती है। जब यह रस से भर जाए और पूरी तरह पक जाए, तो इसे चाशनी से बाहर निकाल लें। यह पारंपरिक और सरल विधि न केवल समय बचाती है, बल्कि बाजार की मिठाइयों से अधिक स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट भी होती है। इस दिवाली अपने मेहमानों को इस रसीली और खस्ता बालूशाही का आनंद जरूर दें।
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