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एक घंटा पहले
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विचारों
सावन में अनरसे की महिमा
सावन का महीना शुरू होते ही घरों में पारंपरिक मिठाइयों की रौनक बढ़ जाती है। इन मिठाइयों में अनरसा अपनी खास जगह रखता है। भगवान की पूजा और भोग लगाने के लिए यह एक उत्तम व्यंजन माना जाता है। चावल और तिल के मेल से तैयार होने वाला अनरसा न केवल स्वाद में बेहतरीन होता है, बल्कि इसे बनाकर आप कई दिनों तक स्टोर करके भी रख सकते हैं।
तैयारी की प्रक्रिया
अनरसा बनाने की शुरुआत चावल से होती है। सबसे पहले चावल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर इन्हें कुछ घंटों के लिए पानी में भिगोकर रख दें। निर्धारित समय के बाद सारा पानी निकालकर चावल को अच्छे से छान लें ताकि अतिरिक्त नमी पूरी तरह निकल जाए। जब चावल सूख जाएं, तो इन्हें दरदरा पीसकर एक मिश्रण तैयार कर लें। दूसरी ओर, तिल को मध्यम आंच पर हल्का भूनकर अलग रख दें। तिल भूनते समय ध्यान रखें कि आंच बहुत तेज न हो, वरना तिल जल सकते हैं।
पकाने का तरीका
अब एक बर्तन में एक कटोरी चीनी और एक कटोरी पानी डालकर चाशनी तैयार करना शुरू करें। जब चाशनी एक तार की हो जाए, तब इसमें पिसा हुआ चावल का आटा धीरे-धीरे मिलाएं। स्वाद और टेक्सचर बढ़ाने के लिए इसमें एक चम्मच घी डालें। जब मिश्रण अच्छे से मिल जाए, तो इसे आंच से उतारकर ठंडा होने के लिए रख दें।
तलने और संरक्षण की विधि
मिश्रण ठंडा होने पर छोटी-छोटी लोइयां या पेड़े बना लें। अब इन पेड़ों के एक तरफ थोड़े भुने हुए तिल चिपका दें। एक कड़ाही में तेल गरम करें और मध्यम आंच पर अनरसों को तलें। इन्हें तब तक तलें जब तक कि दोनों तरफ से इनका रंग सुनहरा न हो जाए और ये पूरी तरह कुरकुरे न बन जाएं। अंत में, जब अनरसे पूरी तरह ठंडे हो जाएं, तो इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए एयरटाइट डिब्बे में भरकर रख लें।
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