80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पीएम मोदी का संबोधन, 75 मिनट के भाषण में विकसित भारत का रोडमैप भारत एक घंटा पहले 3
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की उपलब्धियों और भविष्य के बड़े लक्ष्यों का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने 140 करोड़ देशवासियों को विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

लाल किले से 13वीं बार राष्ट्र का आह्वान

80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराया। अपने 75 मिनट लंबे संबोधन की शुरुआत उन्होंने वंदे मातरम् और तिरंगे के प्रति अगाध श्रद्धा के साथ की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के हर घर में तिरंगे की भावना समाहित है और हर भारतीय का मन राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत है। यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आजादी के बाद पहली बार 15 अगस्त के दिन लाल किले से वंदे मातरम् की गूंज सुनाई दी, जो इस गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने का भी साक्षी है।

प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी सहित उन तमाम महान स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को नमन किया जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। अपने भाषण में उन्होंने सबसे बड़ा जोर इस बात पर दिया कि भारत के नागरिकों को अब छोटे सपने देखने की परिपाटी छोड़नी होगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बड़े सपने ही व्यक्ति और राष्ट्र की सोच का विस्तार करते हैं, क्षितिज को चौड़ा करते हैं और विकास की गति को कई गुना बढ़ा देते हैं। दृढ़ संकल्प ही संभावनाओं के द्वार खोलता है।

विकसित भारत का सामूहिक लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने देश के सामने 2047 तक विकसित भारत बनाने का महात्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह वर्ष भारत की आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक होगा। पीएम मोदी के अनुसार, यह लक्ष्य केवल सरकारी योजना नहीं है, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक परिश्रम, अटूट संकल्प और सक्रिय भागीदारी से ही सिद्ध हो सकेगा। आज जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प ले रहा है, तो इससे पूरी दुनिया में भारत का दृष्टिकोण बदला है और हमारा साहस वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है।

बीते 12 वर्षों की अभूतपूर्व प्रगति

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने पिछले 12 वर्षों के दौरान देश ने जो लंबी छलांग लगाई है, उसका विस्तृत ब्यौरा दिया। एक समय था जब भारत को फ्रैजाइल फाइव अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन आज यह विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है। इन 12 वर्षों में लगभग 25 करोड़ नागरिक गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। विकास के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादन में 4 गुना, खादी और ग्रामोद्योग में 5 गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में 7 गुना, रेलवे कोच निर्माण में 21 गुना और मोबाइल फोन उत्पादन में 33 गुना की वृद्धि हुई है। डिजिटल इंडिया की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंटरनेट यूजर्स 4 गुना और डिजिटल ट्रांजेक्शन 100 गुना बढ़े हैं। सोलर एनर्जी क्षमता जो पहले 2 गीगावॉट थी, वह अब बढ़कर 160 गीगावॉट तक पहुंच गई है। इसके अलावा पाइप गैस कनेक्शन वाले शहर 70 से बढ़कर 700 के पार पहुंच गए हैं।

आत्मनिर्भर भारत और भविष्य की तकनीक

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर अपना भविष्य नहीं गढ़ सकता। मेक इन इंडिया और लोकल फॉर लोकल की नीति को अब और अधिक धार देनी होगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है, जहां 3 बड़े प्लांट स्थापित हो चुके हैं और उनसे निर्यात भी शुरू हो चुका है। आने वाले 7-8 वर्षों में 5 से 8 और नए सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत ने न्यूक्लियर पावर क्षमता को बढ़ाने की योजना बनाई है, जिसके तहत इस दशक में 5 नए न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू किए जाएंगे। हाइड्रोजन ट्रेन की दिशा में भी सरकार तेजी से काम कर रही है।

सप्त धारा से विकास की नई गति

प्रधानमंत्री ने देश के विकास के लिए सात शक्ति धाराओं यानी सप्त धारा का आह्वान किया। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, तकनीक, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर को प्रमुखता दी गई है। उन्होंने कहा कि अगले 5-7 वर्षों में हमें उन कार्यों को पूरा करना है जो पिछले 5-7 दशकों में नहीं हो पाए थे। मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बनाने के लिए लागत और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही, 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों से छोटे उद्योगों और किसानों को बड़ी राहत मिलेगी। अंत में, उन्होंने युवा शक्ति को विकसित भारत का मुख्य इंजन बताया और 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल ट्रेनिंग देने का संकल्प दोहराया।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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