मानसून में सेहत का खजाना बनी राजस्थान की 'कंकेड़ा' सब्जी, जानिए इसके बेमिसाल फायदे और बनाने की पारंपरिक रेसिपी जीवनशैली 5 घंटे पहले 3
राजस्थान के पाली जिले में मॉनसून के मौसम में देसी सुपरफूड 'कंकेड़ा' की मांग काफी बढ़ गई है। स्वाद और सेहत से भरपूर इस सब्जी को लोग पारंपरिक बाजरे के सोगरे के साथ बेहद चाव से खा रहे हैं।

राजस्थान में मानसून की दस्तक के साथ ही बाजारों और रसोई घरों में एक खास पारंपरिक सब्जी की रौनक बढ़ गई है। इसे स्थानीय भाषा में 'कंकेड़ा' कहा जाता है, जिसे देश के कई अन्य हिस्सों में 'कंटोला' के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी अनोखी सब्जी है जो न केवल अपने चटपटे और लाजवाब स्वाद के लिए लोकप्रिय है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी इसे किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं माना जाता। वर्तमान में राजस्थान के पाली जिले की सब्जी मंडियों में कंकेड़ा की भारी मांग देखी जा रही है। लोग इस मौसमी सब्जी को खरीदने के लिए मंडियों में पहुंच रहे हैं और अपने घरों में इसे पारंपरिक तरीके से बनाकर इसका आनंद ले रहे हैं।

औषधीय गुणों की खान है कंकेड़ा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेद के डॉक्टरों का मानना है कि कंकेड़ा सेहत के लिहाज से एक उत्कृष्ट और अत्यंत गुणकारी सब्जी है। मानसून के इस मौसम में जब संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा सबसे अधिक होता है, तब कंकेड़ा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस देसी सुपरफूड में विटामिन C और कई तरह के महत्वपूर्ण एंटी-ऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर को मौसमी सर्दी-जुकाम, वायरल इंफेक्शन और बुखार जैसी तकलीफों से सुरक्षित रखने में बेहद मददगार साबित होते हैं। इसके साथ ही, कंकेड़ा में मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट्स और प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले प्लांट इंसुलिन खून में शुगर की मात्रा को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि डॉक्टर मधुमेह के मरीजों को इस सब्जी का सेवन करने की विशेष सलाह देते हैं। इसमें फाइबर की भी बहुत अधिक मात्रा होती है, जो हमारी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है। सबसे अच्छी बात यह है कि कंकेड़ा में कैलोरी बहुत कम होती है, जिसके कारण यह वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी एक बेहतरीन भोजन विकल्प है।

थाली का बढ़ा जायका: बाजरे के सोगरे के साथ अनूठा संगम

राजस्थान की पारंपरिक रसोई में कंकेड़ा का एक विशेष स्थान है। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों के अनुसार, हर साल वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही बाजार में इस सब्जी की मांग अपने चरम पर पहुंच जाती है। मारवाड़ क्षेत्र में इसे बनाने की अपनी एक अनूठी और पारंपरिक शैली है।

मारवाड़ी घरों में कंकेड़ा की सब्जी को सरसों के तेल, राई, जीरा, तीखी हरी मिर्च और अमचूर के हल्के तड़के के साथ सूखा तैयार किया जाता है। स्थानीय लोग इस चटपटी सब्जी का आनंद गरमा-गरम बाजरे के सोगरे यानी बाजरे की मोटी रोटी के साथ लेते हैं। यह पारंपरिक मेल न केवल भोजन का स्वाद कई गुना बढ़ा देता है, बल्कि बरसात के ठंडे मौसम में शरीर को अंदरूनी गर्मी और भरपूर ताकत भी प्रदान करता है। पाली की मंडियों में इन दिनों लोग इसे बड़े चाव से खरीद रहे हैं ताकि वे इस खास मारवाड़ी स्वाद का लुत्फ उठा सकें।

कंकेड़ा की सूखी सब्जी के लिए आवश्यक सामग्री

यदि आप भी अपने घर पर मारवाड़ी स्वाद वाली कंकेड़ा की सब्जी बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगी:

  • कंकेड़ा (कंटोला): 250 ग्राम (ताजा और छोटे आकार के कंकेड़ा सबसे अच्छे रहते हैं)
  • सरसों का तेल: 3 बड़े चम्मच (पारंपरिक मारवाड़ी स्वाद पाने के लिए सरसों का तेल ही सबसे उत्तम माना जाता है)
  • राई: 1/2 छोटा चम्मच
  • जीरा: 1/2 छोटा चम्मच
  • हींग: 1 चुटकी
  • प्याज: 1 बड़ा (बारीक या लंबाई में कटा हुआ)
  • हरी मिर्च: बारीक कटी हुई (स्वादानुसार)
  • हल्दी पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच
  • धनिया पाउडर: 1 बड़ा चम्मच
  • लाल मिर्च पाउडर: 1 छोटा चम्मच (स्वादानुसार)
  • अमचूर पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच (खट्टेपन के लिए)
  • नमक: स्वादानुसार

कदम-दर-कदम समझें कंकेड़ा बनाने की पारंपरिक विधि

घर पर स्वादिष्ट और चटपटी कंकेड़ा की सब्जी तैयार करने के लिए आप इस सरल और पारंपरिक रेसिपी का पालन कर सकते हैं:

  1. सफाई और कटाई की प्रक्रिया: सबसे पहले बाजार से लाए गए कंकेड़ा को साफ पानी से कम से कम 2 से 3 बार बहुत अच्छी तरह से धो लें। ऐसा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसकी बाहरी खुरदरी सतह पर मिट्टी और धूल जमी हो सकती है। धोने के बाद, कंकेड़ा के दोनों छोरों को काटकर अलग कर दें। इसके बाद इसे अपनी पसंद के अनुसार लंबाई में पतले-पतले टुकड़ों में काट लें। ध्यान रखें कि यदि काटते समय कुछ टुकड़ों में पके हुए और सख्त बीज दिखाई दें, तो उन्हें बाहर निकाल दें, क्योंकि वे पकने के बाद मुंह में आने पर स्वाद बिगाड़ सकते हैं।
  2. तड़का लगाने की तैयारी: अब एक कड़ाही लें और उसमें 3 बड़े चम्मच सरसों का तेल डालकर गैस पर अच्छी तरह से गरम होने दें। जब सरसों के तेल से हल्का धुआं निकलने लगे, तो समझें कि तेल पूरी तरह गरम हो चुका है। अब आंच को थोड़ा धीमा करें और इसमें आधा छोटा चम्मच राई, आधा छोटा चम्मच जीरा और एक चुटकी हींग का तड़का लगाएं।
  3. कंकेड़ा को फ्राई करना: तड़का चटकने के तुरंत बाद कड़ाही में कटी हुई हरी मिर्च और कटे हुए कंकेड़ा के टुकड़े डालें। इसे मध्यम आंच पर बिना ढके लगातार चलाते हुए लगभग 4 से 5 मिनट तक अच्छी तरह से भूनें। इसे तब तक फ्राई करना है जब तक कि कंकेड़ा का रंग हल्का सुनहरा न होने लगे।
  4. प्याज को भूनना: जब कंकेड़ा थोड़ा भुन जाए, तो इसमें बारीक या लंबा कटा हुआ प्याज मिला दें। अब प्याज को सब्जी के साथ लगभग 2 से 3 मिनट तक मध्यम आंच पर भूनें। प्याज को तब तक पकाना है जब तक वह पूरी तरह से नरम और पारदर्शी न हो जाए।
  5. मसालों का मिश्रण: अब गैस की आंच को एकदम धीमा कर दें। कड़ाही में स्वादानुसार नमक, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, एक बड़ा चम्मच धनिया पाउडर और एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डालें। सभी मसालों को सब्जी के साथ बहुत अच्छे तरीके से मिला लें ताकि मसालों की कोटिंग कंकेड़ा के टुकड़ों पर अच्छी तरह हो जाए।
  6. धीमी आंच पर पकाना: मसालों को अच्छी तरह मिलाने के बाद कड़ाही को एक ढक्कन की मदद से ढक दें। इसे धीमी आंच पर लगभग 3 से 4 मिनट तक भाप में पकने दें। ऐसा करने से मसालों का स्वाद सब्जी के अंदर तक अच्छी तरह से समा जाएगा और कंकेड़ा पूरी तरह से पककर नरम हो जाएगा।
  7. अंतिम स्पर्श और परोसना: निर्धारित समय के बाद कड़ाही का ढक्कन हटा दें। अब इसमें आधा छोटा चम्मच अमचूर पाउडर डालें। यदि अमचूर न हो, तो आप नींबू के रस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अमचूर मिलाने के बाद सब्जी को बिना ढके तेज आंच पर करीब 1 मिनट तक खुला ही पकाएं। अब आपकी गरमा-गरम, मसालेदार और सेहतमंद कंकेड़ा की सब्जी पूरी तरह से बनकर तैयार है।

इस लजीज सब्जी को आप गर्मा-गर्म बाजरे के पारंपरिक सोगरे या मक्के की रोटी के साथ परोसें। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में इसे देसी घी और छाछ के साथ खाया जाता है, जो इसके स्वाद को दोगुना कर देता है। आप भी इस मानसून सीजन में इस देसी सुपरफूड को अपनी रसोई का हिस्सा बनाएं और स्वाद के साथ-साथ उत्तम सेहत का वरदान पाएं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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