राष्ट्रीय राजनीति
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केरल के बागान में मजदूर की दर्दनाक मौत
केरल के पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों में जंगली हाथियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब आम लोगों का घर से निकलना भी दूभर हो गया है। इडुक्की जिले के पूपपारा क्षेत्र में एक ऐसी ही हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक जंगली हाथी ने बागान में काम कर रहे 62 वर्षीय मजदूर को मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान ओचा थेवर के रूप में हुई है, जो मूल रूप से तमिलनाडु के बोडिनायकनूर के रहने वाले थे। यह खौफनाक हादसा गुरुवार को थलक्कुलम एस्टेट के 12 एकड़ क्षेत्र में घटित हुआ। देविकुलम रेंज के अधिकारी ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की आधिकारिक पुष्टि की है। हाथी के अचानक हुए इस हमले में ओचा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इलाज के दौरान अस्पताल में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। अब उनके शव को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के लिए इडुक्की मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मोर्चरी में स्थानांतरित किया जा रहा है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा है और बागान में काम करने वाले अन्य मजदूर भारी दहशत में हैं।
थलक्कुलम एस्टेट में हाथियों के झुंड की दहशत
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और वहां काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि गुरुवार की सुबह से ही जंगली हाथियों का एक आक्रामक झुंड इलाके में सक्रिय था। यह एस्टेट रिहायशी बस्तियों के काफी समीप स्थित है, जिसके कारण हाथियों का यहां तक पहुंचना और भी खतरनाक साबित हो रहा है। इन हाथियों ने पूरे इलाके में आतंक मचा रखा है, जिससे मानव और वन्यजीव संघर्ष की स्थिति गंभीर रूप लेती जा रही है। बागान में काम करने वाले गरीब मजदूर इन जंगली जानवरों के सबसे आसान निशाने बनते जा रहे हैं। हाथियों की मौजूदगी के कारण बागानों में काम करने वाले लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और काम पर जाने से कतरा रहे हैं।
वन विभाग की टीम की चुनौतियां
घटना की सूचना मिलते ही डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर यानी डीएफओ और वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए। हाथियों को रिहायशी इलाकों से वापस जंगल की ओर खदेड़ने के लिए वन विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम यानी आरआरटी को तैनात किया गया है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हाथियों को जंगल की तरफ खदेड़े जाने के बाद भी वे बार-बार लौटकर इंसानी बस्तियों और बागानों की तरफ आ जाते हैं। हाथियों की इस वापसी की प्रवृत्ति के कारण स्थानीय लोगों की जान-माल और उनकी फसलों पर लगातार खतरा बना हुआ है। वन विभाग के लिए इन जानवरों को नियंत्रित करना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक जटिल समस्या बन गया है।
मुन्नार में बाल-बाल बची जान
पूपपारा में हुई इस जानलेवा घटना से ठीक एक दिन पहले, मुन्नार में भी ऐसा ही डरावना वाकया देखने को मिला था। बुधवार को मुन्नार शहर के माउंट कार्मेल चर्च के पास एक युवक का आमना-सामना सीधे एक जंगली हाथी से हो गया था। अचानक शहर के भीतर हाथी को घुसते देख वहां हड़कंप मच गया। हाथी के रास्ते में आ जाने के कारण युवक की जान पर बन आई थी, लेकिन गनीमत रही कि वह समय रहते वहां से सुरक्षित भाग निकला। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जो वहां की भयावह स्थिति को बयां करता है। इस दौरान हाथी ने इलाके में भारी तबाही मचाते हुए फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है।
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