उत्तराखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार राजनीतिक दलों का सबसे ज्यादा ध्यान उस युवा वर्ग पर है, जिसे 'जेन जी' (Gen Z) कहा जाता है। यह वह पीढ़ी है जिसका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। हालांकि, विडंबना यह है कि सूबे की राजनीति में जिस वर्ग को सबसे ज्यादा साधने की कोशिश की जा रही है, राज्य की सर्वोच्च नीति-निर्माता संस्था यानी विधानसभा में उसका प्रतिनिधित्व बिल्कुल शून्य है।
वोट बैंक बड़ा, लेकिन सत्ता में भागीदारी शून्य
राजनीतिक विश्लेषकों और दलों के लिए 'जेन जी' मतदाता भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाले साबित हो सकते हैं। इस श्रेणी में आने वाले युवाओं की न्यूनतम उम्र इस समय 14 वर्ष और अधिकतम उम्र 29 वर्ष है। नई दिल्ली में हाल ही में आयोजित हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में भी राजनीतिक दलों को इस खास वर्ग पर अपना ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए थे।
अगर हम उत्तराखंड के जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर नजर डालें, तो राज्य में जेन जी की आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 21 से 25 फीसदी है। वहीं, अगर हम मतदाता सूची के लिहाज से अनुमानित आंकड़ों को देखें, तो कुल मतदाताओं में इनकी हिस्सेदारी लगभग 21 से 22 प्रतिशत के करीब बैठती है। संख्या के लिहाज से यह आबादी करीब 40 से 50 लाख के आसपास हो सकती है। इतने बड़े मतदाता वर्ग के बावजूद उत्तराखंड की 70 सदस्यीय विधानसभा में इस पीढ़ी का एक भी विधायक मौजूद नहीं है।
मिलेनियल्स विधायकों की संख्या भी है बेहद सीमित
जेन जी के बाद अगर हम 'मिलेनियल्स' पीढ़ी की बात करें, तो उनकी स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन वे भी बहुत अधिक संख्या में नहीं हैं। मिलेनियल्स श्रेणी में वे लोग आते हैं जिनका जन्म 1981 से 1996 के बीच हुआ है। वर्तमान समय में इनकी उम्र 30 वर्ष से 45 वर्ष के बीच है।
उत्तराखंड की मौजूदा विधानसभा में 70 सीटों में से लगभग 12 से 15 विधायक मिलेनियल्स श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। हालांकि, यह आंकड़ा केवल एक अनुमान पर आधारित है क्योंकि युवाओं की बड़ी आबादी के मुकाबले यह प्रतिनिधित्व काफी कम नजर आता है।
सदन में लगातार घट रही है युवाओं की भागीदारी
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े उत्तराखंड में युवा जनप्रतिनिधियों की घटती संख्या की ओर इशारा करते हैं। 70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में युवा विधायकों की हिस्सेदारी लगातार कम हुई है:
- वर्ष 2017 के चुनावों में 55 वर्ष या उससे कम आयु के विधायकों का अनुपात 61 फीसदी था।
- वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के बाद यह अनुपात घटकर केवल 51 फीसदी रह गया है।
- सदन में 40 वर्ष या उससे कम उम्र के बेहद गिने-चुने और सीमित विधायक ही पहुंच पाए हैं।
वर्तमान सदन में युवा चेहरे
मौजूदा विधानसभा में बहुत कम ऐसे विधायक हैं जिन्हें युवा वर्ग का प्रतिनिधि कहा जा सकता है। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं:
- हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत
- जसपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक आदेश सिंह चौहान
- ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक रवि बहादुर
ऐसे में यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि जब राज्य की एक-चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली पीढ़ी का कोई भी सदस्य सदन में नहीं होगा, तो उनकी उम्मीदों, आकांक्षाओं और समस्याओं को विधानसभा के पटल पर पुरजोर तरीके से कौन उठाएगा। आने वाले चुनावों में क्या राजनीतिक दल इन युवा चेहरों पर दांव लगाएंगे, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा।
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