बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ की खास मूंनगा-लौकी दाल का उठाएं आनंद, पोषण से भरपूर है यह पारंपरिक रेसिपी जीवनशैली एक महीने पहले 59
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई में मूंनगा और लौकी के साथ बनी दाल का विशेष महत्व है, जो स्वाद और सेहत का एक अनूठा संगम है। यह डिश बरसात के दिनों में सुपाच्य और ऊर्जा देने के लिए जानी जाती है, जिसकी आसान विधि नीचे दी गई है।

बरसात में छत्तीसगढ़ का खास स्वाद

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाक कला अपनी सरलता और पोषण के लिए पूरे देश में मशहूर है। जैसे ही बरसात का मौसम शुरू होता है, खानपान की आदतों में बदलाव आना स्वाभाविक है। इस मौसम में लोग ऐसा भोजन पसंद करते हैं जो हल्का हो, आसानी से पच जाए और शरीर को पर्याप्त ऊर्जा दे सके। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में पीढ़ियों से एक ऐसा ही व्यंजन बनाया जाता रहा है, जो है मूंनगा, लौकी और दाल का मिश्रण। यह रेसिपी न केवल स्वादिष्ट है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी अत्यंत फायदेमंद है।

सेहत और स्वाद का बेहतरीन संगम

बरसात के दिनों में नमी के कारण पाचन तंत्र थोड़ा धीमा हो जाता है, इसलिए ऐसे समय में हल्का भोजन करना ही सही रहता है। मूंनगा यानी सहजन की फलियां और ताजी लौकी के साथ दाल का मेल इसे एक पूर्ण आहार बनाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यंजन न केवल पेट के लिए हल्का है बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर में ताजगी और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।

पोषण का पावरहाउस

यह देसी रेसिपी पोषक तत्वों की दृष्टि से काफी समृद्ध है। मूंनगा में भारी मात्रा में विटामिन सी, आयरन और कैल्शियम पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। वहीं दूसरी ओर, लौकी में पानी की प्रचुर मात्रा होती है जो शरीर को हाइड्रेटेड रखती है और इसमें मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त करता है। अरहर या मूंग दाल के साथ इनका संयोजन इसे प्रोटीन का भी एक बेहतरीन स्रोत बनाता है, जिससे यह एक संतुलित आहार के रूप में उभरती है।

आवश्यक सामग्री की सूची

इस पारंपरिक व्यंजन को बनाने के लिए आपको नीचे दी गई चीजों की आवश्यकता होगी:

  • एक कटोरी अरहर या मूंग दाल।
  • एक मध्यम आकार की ताजी लौकी, जिसे छोटे टुकड़ों में काट लिया गया हो।
  • 2 से 3 मूंनगा या सहजन की फलियां, जिनके टुकड़े कर लिए गए हों।
  • एक मध्यम प्याज, बारीक कटा हुआ।
  • एक बड़ा टमाटर, कटा हुआ।
  • 5 से 6 लहसुन की कलियां।
  • दो हरी मिर्च।
  • आधा चम्मच हल्दी पाउडर।
  • एक चम्मच धनिया पाउडर।
  • आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर।
  • जीरा, राई, तेल, स्वादानुसार नमक और सजावट के लिए हरा धनिया।

बनाने की सरल विधि

सबसे पहले दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और कुछ देर के लिए अलग रख दें। इसके बाद मूंनगा और लौकी को छीलकर उनके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। कुकर को मध्यम आंच पर रखें और इसमें तेल गर्म करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए, तो इसमें जीरा और राई का तड़का लगाएं।

इसके बाद कटे हुए प्याज, लहसुन और हरी मिर्च को कुकर में डालें और सुनहरा होने तक भूनें। अब इसमें टमाटर डालकर मसालों (हल्दी, धनिया, लाल मिर्च) के साथ अच्छी तरह से पकाएं ताकि टमाटर गल जाएं। जब मसाला तेल छोड़ने लगे, तो इसमें कटी हुई लौकी और मूंनगा के टुकड़े डालकर कुछ मिनट तक चलाएं। अंत में धुली हुई दाल, आवश्यकतानुसार नमक और पानी डालें। कुकर का ढक्कन बंद करें और इसे मध्यम आंच पर लगभग पांच सीटी आने तक पकने दें।

परोसने का तरीका

जब कुकर का पूरा प्रेशर निकल जाए, तो ढक्कन खोलें और ऊपर से बारीक कटा हुआ हरा धनिया डालें। यह गर्मागर्म दाल सादे चावल या जीरा राइस के साथ बहुत ही स्वादिष्ट लगती है। यदि आप इसे रोटी के साथ खाना पसंद करते हैं, तो बाजरे की गरमागरम रोटी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। यदि आप बरसात के मौसम में घर जैसा देसी और पौष्टिक भोजन तलाश रहे हैं, तो मूंनगा-लौकी की यह दाल आपके लिए सबसे उपयुक्त और शानदार विकल्प साबित होगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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