नवग्रहों के लिए रत्न, उपरत्न और सही धातु का चुनाव: पूरी जानकारी धर्म एक घंटा पहले 2
ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की मजबूती के लिए विशेष रत्न और धातुओं का महत्व बताया गया है, लेकिन गलत चुनाव नुकसान दे सकता है। यहाँ सभी नौ ग्रहों के लिए उपयुक्त रत्नों, उपरत्नों और उन्हें पहनने की सही विधि की विस्तार से जानकारी दी गई है।

नवग्रह और रत्न धारण का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे जीवन पर नवग्रहों की चाल और स्थिति का सीधा असर पड़ता है। जब कुंडली में कोई ग्रह कमजोर स्थिति में होता है तो उसके नकारात्मक प्रभाव जीवन में दिखाई देने लगते हैं। इसके विपरीत, ग्रह की मजबूत स्थिति व्यक्ति को सफलता और लाभ प्रदान करती है। ज्योतिषी इन ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और शुभ फल प्राप्त करने के लिए संबंधित रत्नों, उपरत्नों और धातुओं को धारण करने का सुझाव देते हैं। हालांकि, अक्सर सही जानकारी न होने के कारण लोग गलत रत्न या धातु चुन लेते हैं, जिससे लाभ के बजाय नुकसान की संभावना बढ़ जाती है। आइए जानते हैं किस ग्रह के लिए क्या पहनना उचित है।

सूर्य, चंद्रमा और मंगल के लिए विकल्प

सूर्य के लिए मुख्य रत्न माणिक्य है और उपरत्न के तौर पर लालडी या सूर्यमणि का प्रयोग किया जा सकता है। इसे तांबे या सोने की अंगूठी में अनामिका उंगली में धारण करना चाहिए। चंद्रमा के लिए मोती मुख्य रत्न है, जबकि इसका सस्ता विकल्प मून स्टोन है। इसे चांदी या कांसा धातु में कनिष्ठा उंगली में पहनना शुभ होता है। मंगल ग्रह के लिए मूंगा धारण करना चाहिए और उपरत्न के रूप में लाल हकीक का उपयोग किया जाता है। इसे तांबा या पीतल की अंगूठी में अनामिका उंगली में पहना जाता है।

बुध, गुरु और शुक्र की रत्न व्यवस्था

बुध ग्रह का मुख्य रत्न पन्ना है और उपरत्न मरगज या पेरिडॉट हैं। इसे सोने की अंगूठी में छोटी उंगली यानी कनिष्ठा में धारण करना चाहिए। गुरु ग्रह के लिए पुखराज सबसे उत्तम माना गया है, और इसका विकल्प सुनहला है। इसे सोने या पीतल में तर्जनी उंगली में धारण करने की सलाह दी जाती है। शुक्र ग्रह के लिए हीरा मुख्य रत्न है, जबकि इसके सस्ते विकल्प तुरमली और सिम्मा हैं। इसे चांदी, प्लैटिनम या व्हाइट गोल्ड में मध्यमा या अनामिका उंगली में पहनना चाहिए।

शनि, राहु और केतु का चयन

शनि ग्रह के लिए नीलम रत्न सबसे प्रमुख है और इसके विकल्प में काला अकीक, लाजवर्त या जमुनिया नीली का उपयोग होता है। इसे लोहे या अष्टधातु में मध्यमा उंगली में धारण करें। राहु के लिए मुख्य रत्न गोमेद है, और उपरत्न में अकीक, तुरसा और साफी आते हैं। इसे अष्टधातु या पंचधातु में मध्यमा उंगली में धारण करना उचित है। केतु के लिए मुख्य रत्न लहसुनिया है, और इसके विकल्प संघीय, गोदंत और फिरोजा हैं। इसे पंचधातु या चांदी में मध्यमा या अनामिका उंगली में पहना जाता है।

उपरत्न का महत्व

उपरत्न उन पत्थरों को कहा जाता है जो मुख्य रत्नों के विकल्प के तौर पर कार्य करते हैं। यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश महंगे मुख्य रत्नों को खरीदने में असमर्थ है, तो वह उन रत्नों के समान लाभ पाने के लिए कम खर्चीले उपरत्नों का चुनाव कर सकता है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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