लौकी के छिलके फेंकने की गलती न करें, इस अनोखी विधि से बनाएं लाजवाब भुजिया जीवनशैली एक महीने पहले 70
अक्सर लोग लौकी छीलकर उसके छिलके कूड़े में डाल देते हैं, लेकिन मिथिलांचल की पारंपरिक विधि से आप इन छिलकों की बेहद स्वादिष्ट भुजिया बना सकते हैं। घी का तड़का और सही तरीके से तैयार की गई यह डिश आपकी सेहत और स्वाद दोनों के लिए बेहतरीन है।

कबाड़ से बनाएं जायकेदार व्यंजन

अक्सर घरों में लौकी की सब्जी तो बड़े चाव से बनाई जाती है, लेकिन उसे छीलते समय निकलने वाले छिलकों को बेकार समझकर कचरे के डिब्बे में फेंक दिया जाता है। अगर आप भी ऐसा ही करते हैं, तो अब रुक जाइए। बिहार और झारखंड के मिथिलांचल क्षेत्र में लौकी के छिलकों से एक बहुत ही लोकप्रिय और स्वादिष्ट डिश बनाई जाती है, जिसे भुजिया कहते हैं। एक बार यदि आपने इस विधि से छिलकों की भुजिया का स्वाद चख लिया, तो यकीन मानिए आप आगे से कभी भी लौकी के छिलके फेंकने की गलती नहीं करेंगे। यह डिश न केवल बनाने में आसान है, बल्कि पोषण से भी भरपूर है।

तैयारी और पकाने की विधि

लौकी के छिलके की भुजिया बनाने का तरीका बहुत ही सरल है। जब आप लौकी छीलें, तो कोशिश करें कि छिलके थोड़े मोटे उतरें। इन्हें बारीक-बारीक टुकड़ों में भुजिया के आकार में काट लें। इस पूरी प्रक्रिया में महज 10 से 12 मिनट का समय लगता है। इसे बनाने के लिए एक कढ़ाई में थोड़ा सा तेल गर्म करें और उसमें जीरा व सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाएं। कटी हुई छिलकों को इसमें डालें और स्वादानुसार नमक व हल्दी मिलाकर मध्यम आंच पर पकने दें। इसे तब तक पकाएं जब तक कि ये नरम न हो जाएं।

घी का जादू

इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत इसके अंत में किया जाने वाला तड़का है। जब भुजिया अच्छी तरह पक जाए और आप गैस बंद करने वाले हों, तो इसमें ऊपर से एक चम्मच शुद्ध घी डाल दें। घी का यह छोटा सा तड़का इस साधारण सी भुजिया के स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है। घी न केवल स्वाद में निखार लाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी फायदेमंद है। चूंकि कद्दू यानी लौकी के छिलके पकाते समय हल्का सा तेल जैसा रस छोड़ते हैं, इसलिए घी इनके साथ मिलकर एक अद्भुत जायका तैयार करता है।

स्वाद के अनुसार बदलाव

मिथिलांचल शैली में बनाई जाने वाली यह भुजिया अपनी सादगी के लिए जानी जाती है, लेकिन आप अपनी पसंद के अनुसार इसमें बदलाव भी कर सकते हैं। यदि आप इसे और अधिक पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो इसमें बारीक कटे हुए आलू शामिल कर सकते हैं। मसालों को लेकर भी आप पूरी तरह स्वतंत्र हैं। हालांकि इसमें हींग, जीरा, हल्दी और धनिया जैसे बुनियादी मसाले ही मुख्य रूप से इस्तेमाल होते हैं। आप अपने परिवार के स्वाद के अनुरूप मिर्च या अन्य मसालों की मात्रा कम या ज्यादा कर सकते हैं। आप इसे गरमा-गरम रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ परोस सकते हैं, यह हर किसी को पसंद आएगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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