झारखंड की पारंपरिक मिठाई ढकनेसर पुवा: मिट्टी की हांडी और खास स्वाद का मेल जीवनशैली 2 महीने पहले 84
झारखंड में विशेष अवसरों पर बनाई जाने वाली पारंपरिक मिठाई ढकनेसर पुवा अपनी अनोखी बनाने की विधि के लिए मशहूर है। यह डिश मिट्टी की हांडी में भाप के जरिए तैयार की जाती है।

ढकनेसर पुवा की खासियत

झारखंड की सांस्कृतिक पहचान में कई पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं, जिनमें ढकनेसर पुवा का नाम बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है। यह मिठाई राज्य के पर्व-त्योहारों और शुभ मौकों पर खास तौर से घरों में तैयार की जाती है। स्वाद और सुगंध का अनूठा मेल इसे अन्य मिठाइयों से अलग बनाता है।

बनाने की विधि

इस व्यंजन को तैयार करने की प्रक्रिया थोड़ी अलग है, जिसमें धैर्य और सही तकनीक की जरूरत होती है। इसे बनाने के चरण इस प्रकार हैं:

  • सबसे पहले अरवा चावल को 1 से 2 घंटे के लिए पानी में भिगोकर रखें।
  • भीगे हुए चावल को अच्छी तरह सुखाकर बारीक पीस लें और फिर इसे छानकर एक महीन पाउडर तैयार करें।
  • इस पाउडर में जरूरत के अनुसार पानी मिलाकर एक पतला बैटर तैयार करें।
  • एक मिट्टी की हांडी को गर्म करें और उसमें तैयार बैटर डालें।
  • हांडी को मिट्टी के ढक्कन से ढक दें और ढक्कन के ऊपर थोड़ा पानी छिड़कें। इससे अंदर भाप बनती है, जो पुवा को धीरे-धीरे पकाने में मदद करती है।

अंतिम तैयारी और परोसने का तरीका

जब पुवा भाप में पूरी तरह पककर तैयार हो जाए, तो इसे परोसने की बारी आती है। सबसे पहले दूध में चीनी मिलाकर उसे अच्छी तरह उबाल लें। तैयार पुवा के ऊपर यह मीठा दूध डालें। स्वाद को और भी शानदार बनाने के लिए इसे नारियल के बुरादे और विभिन्न प्रकार के ड्राई फ्रूट्स से सजाया जाता है। यह मिठाई न केवल सेहत के लिए बेहतर मानी जाती है, बल्कि इसका पारंपरिक स्वाद आज भी लोगों को खूब पसंद आता है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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