झारखंड की पारंपरिक मिठाई देहरी की रेसिपी: घर पर कैसे बनाएं चावल और गुड़ से बनी यह खास डिश जीवनशैली एक दिन पहले 12
झारखंड की पहचान बन चुकी पारंपरिक मिठाई 'देहरी' को चावल और गुड़ के मेल से तैयार किया जाता है। जानिए इसकी आसान रेसिपी जिससे आप घर पर ही इस स्वादिष्ट और कुरकुरी मिठाई का आनंद ले सकते हैं।

झारखंड की समृद्ध विरासत है देहरी

झारखंड में जब भी मीठे और पारंपरिक व्यंजनों की बात होती है, तो 'देहरी' का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। यह सिर्फ एक मिठाई नहीं है, बल्कि राज्य की खानपान संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। आज के आधुनिक दौर में भी गांवों से लेकर शहरों तक, शादी-ब्याह, त्योहारों और शुभ अवसरों पर देहरी को विशेष रूप से बनाया जाता है। प्राचीन काल से ही घरों में महिलाएं इसे बड़े चाव से तैयार करती आई हैं। पहले जब बाजार में मिठाइयों की इतनी भरमार नहीं थी, तब देहरी ही घर में बनी सबसे बेहतरीन मिष्ठान मानी जाती थी। इसे देवी-देवताओं के समक्ष भोग के रूप में भी अर्पित किया जाता है, जो इसकी पवित्रता और महत्व को दर्शाता है।

देहरी का अनूठा स्वाद और बनावट

देहरी की सबसे बड़ी खासियत इसकी बनावट है। यह बाहर से हल्की कुरकुरी होती है, जबकि इसका भीतरी हिस्सा बेहद मुलायम और स्वादिष्ट होता है। गुड़ की चाशनी में लिपटी होने के कारण इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। चावल और गुड़ का यह मेल स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है, यही कारण है कि बच्चे हों या बुजुर्ग, हर आयु वर्ग के लोग इसे बहुत पसंद करते हैं। इसकी सोंधी खुशबू घर में बनते ही माहौल को मिठास से भर देती है।

आवश्यक सामग्री

देहरी बनाने के लिए रसोई में मौजूद साधारण चीजों की ही जरूरत पड़ती है। आपको किसी भी महंगी या दुर्लभ सामग्री की आवश्यकता नहीं है। मुख्य सामग्री इस प्रकार है:

  • अच्छी गुणवत्ता वाला चावल
  • ताजी दही
  • शुद्ध घी
  • इलायची पाउडर
  • गुड़ (मिठास के लिए)
  • थोड़ी-सी चीनी
  • पानी
  • हल्दी (विकल्प के तौर पर रंग और स्वाद के लिए)

देहरी बनाने में दही का उपयोग घोल को सही बनावट देने के लिए किया जाता है, जिससे मिठाई अंदर से नरम बनती है। वहीं, घी और इलायची इसकी सुगंध को कई गुना बढ़ा देते हैं।

स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी

घोल तैयार करना

सबसे पहले चावल को अच्छी तरह से साफ पानी से धो लें। इसके बाद इसे करीब एक से दो घंटे के लिए पानी में भिगोकर छोड़ दें। जब चावल पूरी तरह फूल जाए, तो अतिरिक्त पानी निकाल दें। अब इस भीगे हुए चावल को मिक्सी या सिलबट्टे की मदद से बारीक पीस लें। इस बात का खास ख्याल रखें कि पेस्ट एकदम चिकना हो और चावल का कोई भी दाना साबुत न रहे। अब इस पिसे हुए चावल के पेस्ट में दही, घी और इलायची पाउडर को अच्छे से मिला लें। पानी को थोड़ा-थोड़ा करके डालें ताकि घोल मध्यम गाढ़ा तैयार हो। ध्यान रहे कि घोल न ज्यादा पतला होना चाहिए और न ही बहुत गाढ़ा। इस तैयार मिश्रण को एक घंटे के लिए ढककर रख दें ताकि यह अच्छी तरह सेट हो जाए।

तलने की प्रक्रिया

एक कड़ाही में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल गरम करें। जब तेल मध्यम गरम हो जाए, तब किसी सांचे, कटोरी या बड़े चम्मच की सहायता से थोड़ा-थोड़ा घोल कड़ाही में डालें। इसे मध्यम आंच पर तलें ताकि यह अंदर तक पक जाए। देहरी को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक फ्राई करना है। जब यह कुरकुरी हो जाए, तो इसे एक प्लेट में निकाल लें। इसी तरह पूरे घोल का उपयोग करके सारी देहरी तैयार कर लें।

गुड़ की चाशनी में डुबोना

अब एक दूसरी कड़ाही में गुड़, थोड़ी-सी चीनी और आवश्यकतानुसार पानी डालकर गरम करें। इसे लगभग पांच मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं और बीच-बीच में चलाते रहें ताकि गुड़ पूरी तरह घुल जाए। जब चाशनी हल्की गाढ़ी और गहरे लाल रंग की दिखने लगे, तो आंच को बिल्कुल धीमा कर दें। अब तली हुई देहरी को इस चाशनी में डालें और एक से दो मिनट तक धीरे-धीरे मिलाएं। इससे चाशनी की एक अच्छी परत हर देहरी पर चढ़ जाएगी। अंत में गैस बंद कर दें।

परोसने का तरीका

आपकी पारंपरिक झारखंडी देहरी बनकर तैयार है। आप इसे गर्मागर्म परोस सकते हैं या ठंडा होने का इंतजार भी कर सकते हैं। दोनों ही रूपों में इसका स्वाद लाजवाब होता है। एक बार इस विधि से देहरी बनाने के बाद आप इसे बार-बार बनाना चाहेंगे, क्योंकि यह न केवल बनाने में आसान है बल्कि स्वाद में भी बेजोड़ है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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