जीवनशैली
एक घंटा पहले
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गर्मी का मौसम आते ही बाजार में आम, तरबूज और खरबूज के साथ-साथ लीची की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है। स्वाद में मीठी और दिखने में स्ट्रॉबेरी जैसी यह लाल फल न सिर्फ खाने में लाजवाब है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। लेकिन अब चिंता की बात यह है कि आम और तरबूज के बाद मुनाफाखोरों ने लीची पर भी केमिकल का प्रयोग शुरू कर दिया है।
कहां उगाई जाती है लीची
लीची की पैदावार सबसे ज्यादा बिहार, झारखंड, बांग्लादेश, पंजाब और असम में होती है। इन्हीं इलाकों से यह फल देशभर के बाजारों तक पहुंचता है। गर्मी के दिनों में इसकी खपत काफी बढ़ जाती है, यही वजह है कि इसकी मांग को देखते हुए इसमें मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है।
सेहत के लिए कितनी फायदेमंद
लीची शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाती है। इसके सेवन से डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी से बचाव होता है। इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जो त्वचा और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए इसे एक बेहतरीन विकल्प बनाता है।
क्यों होती है मिलावट
दरअसल, अधिकतर लोगों को लीची के असली रंग के बारे में सही जानकारी नहीं होती। इसी गलतफहमी का फायदा उठाकर मुनाफाखोर इसमें मिलावट कर देते हैं और कृत्रिम तरीके से इसका रंग आकर्षक बना देते हैं। इसलिए जब भी आप बाजार से लीची खरीदें, तो पूरी सावधानी बरतना जरूरी है।
ऐसे करें असली और ऑर्गेनिक लीची की पहचान
बाजार से लीची खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह प्राकृतिक यानी ऑर्गेनिक तरीके से उगाई और पकाई गई हो। नेचुरल तरीके से पकी लीची की कुछ खास पहचान होती है, जिन्हें जानकर आप मिलावटी और केमिकलयुक्त फल से बच सकते हैं और अपने तथा परिवार की सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं।
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