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एक दिन पहले
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मानसून में लोकप्रिय है डोका का स्वाद
मिथिलांचल के क्षेत्रों में इन दिनों लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित है, लेकिन यह मौसम नॉनवेज के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन अवसर लेकर आया है। इस दौरान मिथिलांचल में डोका यानी घोंघा की एक प्रजाति की मांग काफी बढ़ जाती है। लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं और यह मटन के स्वाद को भी कड़ी टक्कर देता है। खेतों और जलभराव वाले इलाकों में पानी जमा होने के कारण डोका आसानी से मिल जाता है। इसे खाने के दो प्रमुख तरीके हैं, पहला मटन के अंदाज में इसकी ग्रेवी बनाना और दूसरा इसे भूनकर तैयार करना।
बाजार में उपलब्धता और कीमत
अगर आप इन दिनों मिथिलांचल के किसी भी बाजार में जाएंगे, तो वहां डोका आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। हालांकि, बढ़ती लोकप्रियता और मांग के कारण अब इसकी कीमतें भी ऊपर गई हैं। वर्तमान में यह बाजार में 300 रुपये से लेकर 350 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। डोका के शरीर के दो हिस्से होते हैं, जिसमें से एक हिस्सा थोड़ा सख्त होता है, जिसका उपयोग खास तौर पर मटन रेसिपी बनाने के लिए किया जाता है। स्थानीय लोग इसे बेहद आनंद के साथ खाते हैं।
कैसे तैयार करें डोका की मटन स्टाइल रेसिपी
डोका को मटन की तरह पकाने की प्रक्रिया काफी सरल है। इसके लिए सबसे पहले आपको प्याज, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक की आवश्यकता होती है। प्याज को काटकर उसमें हल्दी, मिर्च, धनिया, नमक और गरम मसाला जैसे घरेलू मसालों के साथ डोका को अच्छी तरह मिला लिया जाता है। इसके बाद एक बर्तन या कुकर में तेल गर्म करके उसमें जीरा और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाया जाता है। जब तड़का चटक जाए, तो उसमें मसालों में लिपटे डोका के मिश्रण को डाल दिया जाता है।
पकाने के तरीके और टिप्स
कड़ाही में धीमी आंच पर डोका को अच्छी तरह फ्राई करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। अच्छी तरह फ्राई हो जाने के बाद, आप अपनी पसंद के अनुसार इसमें ग्रेवी के लिए पानी डाल सकते हैं। यदि आप इसे कुकर में बना रहे हैं, तो 3-4 सिटी तक पकाना पर्याप्त होता है। कई लोग कड़ाही में भी इसे बनाना पसंद करते हैं, क्योंकि इसमें स्वाद अधिक निखर कर आता है। इसमें थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन इसका परिणाम किसी बेहतरीन मटन डिश जैसा ही स्वादिष्ट होता है।
स्वादिष्ट और सेहतमंद
मिथिलांचल के लोग अक्सर डोका मटन बनाने के दौरान इसमें आलू का भी उपयोग करते हैं। आलू के छिलके उतारकर उसे छोटे टुकड़ों में काटकर डालने से स्वाद और भी बढ़ जाता है। लोग न केवल स्वाद के लिए इसे खाते हैं, बल्कि यह सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद माना जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि डोका शरीर को गर्म रखता है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ने में भी मददगार साबित हो सकता है।
क्यों माना जाता है इसे शुद्ध आहार
मिथिला क्षेत्र में डोका को बेहद शुद्ध खाद्य पदार्थ माना जाता है। इसके पीछे कारण यह है कि यह जीव केवल मिट्टी और पानी में रहता है और केवल मिट्टी ही खाता है। तालाबों के किनारे या खेतों की मेड़ पर जहां थोड़ा पानी और कीचड़ जमा होता है, वहां डोका आसानी से मिल जाते हैं। क्योंकि इसका खान-पान प्राकृतिक होता है, इसलिए इसे खाने में लोग संकोच नहीं करते और इसे मटन के विकल्प के रूप में बड़े गर्व के साथ परोसा और खाया जाता है।
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