राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
ब्रिक्स मंच से जयशंकर की बड़ी पहल
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन-2026 के दौरान वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत ने दुनिया को भविष्य का रास्ता दिखाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच से स्पष्ट संदेश दिया कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें एक ऐसे ऊर्जा तंत्र को विकसित करने की आवश्यकता है, जो किसी भी प्रकार के बाहरी संकट को झेलने में समर्थ हो। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया बड़े आर्थिक और सुरक्षा संबंधी बदलावों से गुजर रही है।
दोहरी मार झेल रही वैश्विक अर्थव्यवस्था
मौजूदा समय में दुनिया मुख्य रूप से दो बड़े संकटों से घिरी हुई है। पहली चुनौती अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा शुरू किए गए टैरिफ युद्ध से जुड़ी है, जिसने वैश्विक आर्थिक ढांचे की नींव को हिलाकर रख दिया है। दूसरी बड़ी समस्या पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के कारण उत्पन्न हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है, वहां वर्चस्व को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच गहरा तनाव बना हुआ है। इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों पर लगातार हमलों के चलते ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह बाधित हुई है, जिससे दुनिया भर में एलपीजी और तेल का संकट गहरा गया है।
ऊर्जा सुरक्षा और विकास की नई राह
इन विपरीत परिस्थितियों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ ही पूरी दुनिया के सामने एक नया दृष्टिकोण रखा है। उन्होंने एक ऐसी मजबूत और लचीली ऊर्जा प्रणाली के निर्माण की वकालत की है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी प्रकार के अवरोध या संकट की स्थिति में विफल न हो। जयशंकर का मानना है कि विकासशील देशों को न केवल इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए, बल्कि अपनी आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों को भी तेज करना होगा।
भविष्य की रणनीतिक तैयारी
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भविष्य की उन संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा की जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकती हैं। उनका जोर इस बात पर रहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से एक ऐसे तंत्र का विकास किया जाए जो किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष के कारण पैदा होने वाले तेल और ऊर्जा संकट से निपटने में सक्षम हो। भारत की मेजबानी में हो रहा यह आयोजन दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं को नई दिशा देने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
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