समस्तीपुर कलेक्ट्रेट के पास पिछले 20 साल से मिल रहा है नमक में भुना अनोखा भूजा, चंद्र प्रताप के स्वाद के दीवाने हैं लोग जीवनशैली एक घंटा पहले 2
बिहार के समस्तीपुर में कलेक्ट्रेट के पास मिलने वाला यह गरमा-गरम भूजा लोगों की पहली पसंद बन चुका है, जिसे पारंपरिक बालू के बजाय नमक में भूनकर तैयार किया जाता है।

बिहार की समृद्ध खान-पान संस्कृति में पारंपरिक 'भूजा' का एक बेहद खास स्थान रहा है। शाम के हल्के-फुल्के नाश्ते से लेकर दोस्तों के साथ गपशप करने तक, स्वादिष्ट भूजा हर महफिल का हिस्सा बन जाता है। बिहार के समस्तीपुर जिले में एक ऐसा ही ठिकाना है, जो पिछले दो दशकों से स्थानीय लोगों के लिए बेहतरीन स्वाद का केंद्र बना हुआ है। समस्तीपुर कलेक्ट्रेट के पास, कोलंबस के समीप लगने वाली चंद्र प्रताप की भूजा दुकान आज शहर में किसी पहचान की मोहताज नहीं है। यहां दोपहर ढलते ही लोगों की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है, जो रात के करीब 8 बजे तक लगातार बनी रहती है।

बालू की जगह नमक में भूनने की अनोखी तकनीक

आमतौर पर आपने देखा होगा कि देहाती और पारंपरिक इलाकों में भूजा को लोहे की कड़ाही में रेत या बालू के साथ भूना जाता है। लेकिन चंद्र प्रताप के भूजे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे इसे भूनने के लिए बालू का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते हैं। वे इसे पूरी तरह से शुद्ध नमक में भूनकर तैयार करते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले चंद्र प्रताप पिछले 20 वर्षों से समस्तीपुर में इसी स्थान पर अपनी दुकान लगा रहे हैं। उनका कहना है कि नमक में भूनने की वजह से इसके दाने-दाने में एक अलग कुरकुरापन आ जाता है, जिससे लोगों को बिल्कुल घर में बने ताजे भूजे जैसा अहसास मिलता है।

12 खास सामग्रियों का बेजोड़ मेल और किफायती दाम

इस गरमा-गरम भूजे को विशेष बनाने के लिए चंद्र प्रताप इसमें एक या दो नहीं, बल्कि कुल 12 तरह की सामग्रियां मिलाते हैं। ग्राहकों को परोसे जाने वाले इस स्वादिष्ट मिश्रण में मुख्य रूप से निम्नलिखित अनाज और सामग्रियां शामिल होती हैं:

  • चना
  • बादाम
  • चूड़ा
  • गेहूं
  • मक्का

इन सभी अनाजों को अच्छी तरह से भूनने के बाद आपस में मिलाया जाता है। इस स्वादिष्ट और सेहतमंद भूजे की कीमत भी बेहद किफायती रखी गई है। मात्र 20 रुपये में 100 ग्राम गरमा-गरम भूजा ग्राहकों को परोसा जाता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि ग्राहकों को पहले से तैयार किया गया ठंडा भूजा नहीं दिया जाता, बल्कि उनकी मांग पर कढ़ाई से निकालकर बिल्कुल ताजा और गर्म भूजा परोसा जाता है। स्वाद को और ज्यादा लाजवाब बनाने के लिए इसे तीखी और चटपटी चटनी के साथ परोसा जाता है, जो इसके जायके में चार चांद लगा देती है।

रोजाना उमड़ती है सैकड़ों ग्राहकों की भीड़

चंद्र प्रताप के इस अनोखे स्वाद के दीवानों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। दोपहर में दुकान सजने के बाद से लेकर रात के 8 बजे तक यहां ग्राहकों का तांता लगा रहता है। चंद्र प्रताप के मुताबिक, उनकी दुकान पर हर दिन कम से कम 500 से अधिक और 1000 से कम लोग भूजे का स्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं। इतने वर्षों से लगातार एक ही जगह पर टिके रहना और लोगों के भरोसे को बनाए रखना कोई आसान काम नहीं था। चंद्र प्रताप के लिए यह काम केवल अपनी आजीविका चलाने का जरिया नहीं है, बल्कि समस्तीपुर के लोगों के दिलों में अपनी खास पहचान बनाने का एक बेहद खूबसूरत सफर है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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