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7 घंटे पहले
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मानसून में मिथिलांचल का लोकप्रिय व्यंजन
लगातार हो रही बारिश ने मिथिलांचल के नॉनवेज प्रेमियों के लिए खास मौके ला दिए हैं। इन दिनों खेतों और जलाशयों में पानी भरने के कारण डोका या घोंघा की उपलब्धता काफी बढ़ गई है। मिथिला क्षेत्र में रहने वाले लोग इसे बड़े ही चाव और उत्साह के साथ खाते हैं। बाजार में इन दिनों इसकी काफी मांग देखी जा रही है और यह चिकन व मटन जैसे मांसाहारी व्यंजनों को स्वाद के मामले में कड़ी टक्कर देता है। डोका को मुख्य रूप से दो तरीकों से बनाया जाता है, जिसमें से एक तरीका मटन की तरह ग्रेवी बनाकर तैयार करना है और दूसरा तरीका इसे भूनकर खाना है। इसका लाजवाब स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है।
बाजार में उपलब्धता और दाम
मिथिलांचल के किसी भी हिस्से में इन दिनों बारिश का मौसम छाया हुआ है, जिस कारण डोका कहीं भी आसानी से मिल जाता है। घोंघा की इस प्रजाति को स्थानीय बाजारों में 300 से 350 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। हालांकि, पहले के मुकाबले अब इसकी कीमत थोड़ी अधिक हो गई है, लेकिन इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। डोका की संरचना में दो हिस्से होते हैं, जिनमें से एक हिस्सा थोड़ा सख्त होता है, जिसे मटन के तरीके से पकाकर खाना लोग बेहद पसंद करते हैं।
डोका मटन बनाने की आसान विधि
डोका को पकाने की प्रक्रिया काफी हद तक मटन बनाने जैसी ही होती है। इसे तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री में प्याज, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक का उपयोग किया जाता है। बनाने की विधि इस प्रकार है:
- सबसे पहले प्याज को सामान्य तरीके से काट लें।
- अब डोका में हल्दी, मिर्च, धनिया पाउडर, नमक और गरम मसाला जैसी घरेलू सामग्री को अच्छी तरह मिला लें।
- इसे पकाने के लिए आप कुकर या कढ़ाई किसी का भी चुनाव कर सकते हैं।
- बर्तन में तेल गरम करें और उसमें जीरा व सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाएं।
- तड़का चटकने के बाद, मसाले में मिक्स किया हुआ डोका डालें।
- इसे धीमी आंच पर अच्छी तरह फ्राई करें, जब तक कि यह अच्छी तरह पक न जाए।
- यदि आप ग्रेवी चाहते हैं, तो अपनी आवश्यकतानुसार हल्का पानी डालें।
- कुकर में पका रहे हैं तो 3 से 4 सीटी लगाना पर्याप्त होता है, हालांकि कढ़ाई में धीमी आंच पर बनाने से इसका स्वाद और भी निखर कर आता है।
इसमें थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन अंत में मिलने वाला स्वाद मटन की तरह ही लाजवाब होता है।
सेहत के लिए डोका के अनूठे फायदे
स्वाद के साथ-साथ डोका को स्वास्थ्य के नजरिए से भी काफी फायदेमंद माना गया है। कई लोग डोका मटन में आलू डालना पसंद करते हैं, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि डोका का सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी लाभदायक हो सकता है। इसके अलावा, यह शरीर को गर्म रखने में मदद करता है, जो बारिश के मौसम के लिए काफी उपयुक्त है। डोका को पूरी तरह से शुद्ध माना जाता है क्योंकि यह केवल मिट्टी और पानी में पलता है और केवल मिट्टी का ही सेवन करता है। तालाबों के किनारे, खेतों की मेड़ या कीचड़ वाली जगहों पर आसानी से मिल जाने वाला डोका मिथिला के खानपान की एक अनूठी पहचान बन चुका है, जिसे लोग बड़ी रुचि के साथ पकाकर और खाकर इस मौसम का आनंद लेते हैं।
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