खंडवा में मानवता की मिसाल: डॉक्टर और उनकी टीम बनी लाचार बुजुर्ग का सहारा, कराया इलाज मध्य प्रदेश एक महीने पहले 55
मध्य प्रदेश के खंडवा में एक बेसहारा बुजुर्ग के लिए डॉक्टर और मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की टीम फरिश्ता बनकर सामने आई है। गैंग्रीन से जूझ रहे इस बुजुर्ग का न केवल इलाज कराया गया, बल्कि उनके रहने और खाने-पीने की जिम्मेदारी भी उठाई गई है।

मानवता और सेवा का एक अनूठा उदाहरण

मध्य प्रदेश के खंडवा शहर से एक ऐसी हृदयस्पर्शी खबर सामने आई है, जो समाज को प्रेरणा देने का काम कर रही है। आज के दौर में जहां स्वास्थ्य सेवाएं और उपचार काफी हद तक आर्थिक संसाधनों पर आधारित हैं, वहां खंडवा के एक संवेदनशील डॉक्टर और उनकी पूरी टीम ने मानवीय मूल्यों की एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने एक ऐसे बेसहारा बुजुर्ग का हाथ थाम लिया है, जिसका इस दुनिया में अपना कहने वाला कोई नहीं है। यह केवल एक चिकित्सा सहायता नहीं, बल्कि करुणा और निस्वार्थ सेवा की एक ऐसी मिसाल है जो समाज में विश्वास को मजबूत करती है।

कौन हैं पीड़ित बुजुर्ग और क्या है उनकी समस्या

इस पूरी घटना के केंद्र में राजस्थान के जालौन इलाके के रहने वाले चंपालाल जैन हैं। बुजुर्ग चंपालाल पिछले काफी समय से देश भर में भ्रमण करते हुए भगवान महावीर के सिद्धांतों का पालन करते हुए जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके पास न तो कोई परिवार है और न ही रहने के लिए कोई निश्चित ठिकाना। वे मुख्य रूप से रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर ही अपना समय बिताते रहे हैं। इसी दौरान उनके पैर में एक गंभीर चोट लग गई थी। समय पर उचित देखभाल और इलाज न मिल पाने के कारण यह मामूली चोट एक खतरनाक बीमारी गैंग्रीन में तब्दील हो गई। उनकी स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई थी कि नौबत यहां तक आ गई थी कि उनका पैर काटने की आवश्यकता पड़ सकती थी।

डॉक्टर अनिल पटेल बने फरिश्ता

ऐसी कठिन परिस्थितियों में खंडवा के डॉक्टर अनिल पटेल उनके जीवन में आशा की किरण बनकर आए। डॉक्टर पटेल ने न केवल चंपालाल का प्राथमिक उपचार किया, बल्कि लगातार तीन दिन तक उनकी पूरी देखरेख की। उन्होंने बुजुर्ग के भोजन और आवश्यक दवाइयों का पूरा प्रबंध किया। जब डॉक्टर को यह महसूस हुआ कि घाव की स्थिति गंभीर है और उन्हें विशेष देखभाल की जरूरत है, तो उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर उन्हें नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया। फिलहाल वहां उनका उपचार चल रहा है और वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं।

डॉक्टर अनिल पटेल का अनुभव

डॉक्टर अनिल पटेल ने बताया कि चंपालाल जी को करीब दो महीने पहले पैर में चोट लगी थी, जो अब गैंग्रीन के रूप में जानलेवा साबित हो सकती थी। उन्होंने कहा, मैंने जब उनकी स्थिति देखी तो मुझे लगा कि केवल मरहम-पट्टी से काम नहीं चलेगा। उनके पास न तो खाने की व्यवस्था है और न ही रहने का कोई सुरक्षित स्थान। ऐसी लाचारी को देखते हुए हमने यह तय किया कि उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराना ही एकमात्र सही रास्ता है ताकि समय रहते उन्हें जीवनदान मिल सके।

टीम भावना के साथ आगे बढ़े साथी

इस पूरे सेवा कार्य में डॉक्टर अनिल पटेल अकेले नहीं हैं। उनके साथ उनकी पूरी टीम कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। इस नेक कार्य में भूरू यादव, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव विक्रम सिंह दागी, अनीश यादव, रोहित करोड़ी और पत्रकार सावन पाटिल सहित अन्य साथियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन सभी ने मिलकर बुजुर्ग को अस्पताल पहुँचाने और तब से अब तक उनकी निरंतर सेवा करने का जिम्मा उठाया है।

मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म

टीम के सदस्य और मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव विक्रम सिंह दागी और अनीश यादव ने भावुक होते हुए कहा, मानव सेवा ही इस दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है। दादा का इस संसार में कोई नहीं है, लेकिन अब हम ही उनका परिवार हैं। हमें भगवान ने उनके पास भेजा है, इसलिए हम अपना कर्तव्य निभा रहे हैं और जब तक उन्हें जरूरत है, हम उनकी सेवा करते रहेंगे। वहीं भूरू यादव और रोहित करोड़ी का कहना है कि चंपालाल जैन सादगी भरा जीवन जीते हैं और उन्होंने समाज को हमेशा कर्म और सेवा का संदेश दिया है। आज जब वे स्वयं मुसीबत में हैं, तो खंडवा की इस टीम ने यह सिद्ध कर दिया है कि इंसानियत आज भी जीवित है। यह पहल साबित करती है कि यदि इरादा नेक हो, तो कोई भी किसी व्यक्ति का जीवन पूरी तरह बदल सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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