‘भारत नंबर 1’ कहने वाले नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल पहुंचे चीन, मिला चौंकाने वाला ‘सरप्राइज’ विश्व 3 दिन पहले 21
भारत का एक हफ्ते का सफल दौरा खत्म करते ही नेपाल के नए विदेश मंत्री शिशिर खनाल चार दिनी यात्रा पर बीजिंग पहुंचे, जहां चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ‘बिना शर्त समर्थन’ का दांव खेलकर काठमांडू को दोबारा अपने पाले में खींचने की कोशिश की।

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के बाद ‘भारत हमारे लिए नंबर 1 रहेगा’ का खुला ऐलान करने वाले नेपाल के नए विदेश मंत्री शिशिर खनाल अपने एक सप्ताह लंबे और बेहद सफल भारत दौरे के तुरंत बाद सीधे चीन की राजधानी बीजिंग जा पहुंचे। पड़ोसियों का मिजाज भांपने के इसी मिशन पर निकले खनाल को वहां ऐसा हैरान कर देने वाला ‘सरप्राइज’ मिला, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया।

भारत का दौरा समाप्त कर 14 जून को चार दिनों की यात्रा पर चीन पहुंचे खनाल का स्वागत खुद शी जिनपिंग के भरोसेमंद और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने किया। मंगलवार को बीजिंग में दोनों नेताओं के बीच एक बेहद हाई-प्रोफाइल बैठक हुई, जिसे अंतरराष्ट्रीय हलकों में सस्पेंस से भरी मुलाकात माना जा रहा है।

भारत से लौटते ही बीजिंग में महा-मंथन

नेपाल के नए विदेश मंत्री का भारत की ओर झुकाव देखकर चीन पहले से ही सतर्क था। यही वजह रही कि भारत से लौटते ही वांग यी ने बिना देर किए खनाल के साथ लंबी बातचीत की मेज साझा की। इस बैठक के तुरंत बाद शिशिर खनाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दोनों देशों ने संपर्क, सीमा प्रबंधन, व्यापार, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और बहुपक्षीय सहयोग समेत द्विपक्षीय संबंधों के हर पहलू पर बेहद खुलकर चर्चा की।

जिनपिंग के दूत ने लुटाया ‘प्यार’

जयशंकर से मुलाकात के बाद खनाल ने दुनिया के सामने कहा था कि ‘भारत, नेपाल के लिए नंबर 1 रहेगा’। उन्होंने भारत की मदद के लिए आभार जताते हुए दावा किया था कि नेपाल अपने पड़ोसी देशों में भारत को सबसे ज्यादा अहमियत देगा। शायद इसी वजह से बीजिंग पहुंचे खनाल को रिझाने के लिए वांग यी ने तारीफों के पुल बांधने शुरू कर दिए।

मुलाकात के बाद चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बीजिंग का नया रुख साफ झलक रहा था। वांग यी ने नेपाली विदेश मंत्री से कहा, ‘चीन ने अपनी पड़ोसी कूटनीति में हमेशा नेपाल के साथ रिश्तों को बेहद खास और सबसे ऊंचा स्थान दिया है। चीन हमेशा की तरह नेपाल की राष्ट्रीय संप्रभुता, आजादी और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए मजबूत चट्टान की तरह उसके साथ खड़ा रहेगा।’

‘नेपाल अपने देश और अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकास का जो भी रास्ता चुनेगा, चीन बिना किसी शर्त के उसमें अपना पूरा समर्थन देगा।’

पड़ोसियों को कर्ज के जाल में फंसाकर इस्तेमाल करने की रणनीति के लिए जाना जाने वाला चीन अब ‘मददगार पड़ोसी’ की छवि गढ़ने में जुटा हुआ है। माना जा रहा है कि कड़े रुख के बजाय ‘बिना शर्त और अटूट समर्थन’ का यह सरप्राइज गिफ्ट नेपाल को दोबारा उसी पुराने कर्ज और कूटनीति के जाल में फंसाने की चाल हो सकती है।

नेपाल में बदला माहौल, घबराया चीन

दरअसल इस साल नेपाल के आम चुनावों में जो हुआ, उसकी कल्पना शायद बीजिंग ने कभी नहीं की थी। नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने देश के इतिहास की एक भारी और ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिसके बाद विदेश मंत्री बने शिशिर खनाल की इस बीजिंग यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं।

चीन के करीबियों की विदाई

RSP की इस प्रचंड आंधी ने नेपाल के कद्दावर कम्युनिस्ट नेताओं के.पी. शर्मा ओली और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के उस लंबे शासन को हमेशा के लिए उखाड़ फेंका, जो काठमांडू को भारत से दूर कर पूरी तरह बीजिंग की गोद में ले जाने की कोशिश में लगे थे। ओली के दौर में चीन नेपाल के भीतर बेधड़क दखल देता था, जो अब लगभग बंद हो चुका है।

बदल गया रिश्तों का पूरा अध्याय

कम्युनिस्टों के सत्ता से बाहर होते ही चीन को सबसे बड़ा डर यही सता रहा है कि कहीं नेपाल पूरी तरह भारत के पाले में न चला जाए और उसके अरबों रुपये के प्रोजेक्ट अधर में न लटक जाएं। यही कारण है कि जब ‘भारत को नंबर 1’ प्राथमिकता देने वाली नई सरकार के विदेश मंत्री बीजिंग पहुंचे, तो वांग यी उन पर जरूरत से ज्यादा स्नेह लुटाते नजर आए, ताकि बिगड़ते समीकरणों को किसी तरह संभाला जा सके और दोनों देशों के रिश्तों को चीन के फायदे के मुताबिक नया आकार दिया जा सके।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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