घर पर बनाएं छत्तीसगढ़ का पारंपरिक आमा खोईला, गर्मी में तैयार यह अमचूर सालभर बढ़ाता है भोजन का जायका जीवनशैली एक महीने पहले 23
छत्तीसगढ़ में गर्मी के मौसम में कच्चे आम से तैयार होने वाला आमा खोईला यानी अमचूर एक पूरी तरह प्राकृतिक मसाला है। धूप में सुखाकर बनाया जाने वाला यह पारंपरिक मसाला महीनों तक सुरक्षित रहता है और दाल, सब्जी व चटनी में खट्टापन तथा स्वाद बढ़ाता है।

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खानपान संस्कृति में आमा खोईला यानी अमचूर का खास महत्व है। गर्मी के दिनों में जब बाजार और बगीचे कच्चे आमों से भर जाते हैं, तब ग्रामीण इलाकों में महिलाएं और परिवार सालभर की जरूरत के लिए इसे तैयार करते हैं। यह पूरी तरह प्राकृतिक मसाला है, जिसे कच्चे आम को काटकर धूप में सुखाने के बाद बनाया जाता है।

दाल, सब्जी, चटनी और कई पारंपरिक व्यंजनों में आमा खोईला का उपयोग खट्टापन और स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला यह मसाला न सिर्फ भोजन का जायका बढ़ाता है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खाद्य विरासत को भी जीवित रखता है। जब ताजे आम बाजार में उपलब्ध नहीं होते, तब यही अमचूर भोजन में खट्टापन लाने का काम करता है।

कच्चे आम से होता है तैयार

आमा खोईला बनाने के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले खट्टे कच्चे आमों को चुना जाता है। आमों को अच्छी तरह धोकर उनका छिलका उतारा जाता है और छोटे या पतले टुकड़ों में काटा जाता है, ताकि उन्हें सुखाने में आसानी हो।

कटे हुए टुकड़ों को साफ कपड़े, चटाई या बांस की टोकरी में फैलाकर तेज धूप में सुखाया जाता है। आमतौर पर 4 से 7 दिनों तक धूप में रखने पर टुकड़े पूरी तरह सूख जाते हैं। इस दौरान रात के समय इन्हें घर के भीतर रख लिया जाता है, ताकि इन पर नमी न आए।

पाउडर और टुकड़ों, दोनों रूप में इस्तेमाल

पूरी तरह सूख जाने के बाद आम के टुकड़ों को सीधे संग्रहित किया जा सकता है, या फिर मिक्सी में पीसकर अमचूर पाउडर तैयार किया जाता है। दोनों ही रूपों में इसका उपयोग दाल, सब्जी, चटनी और तरह-तरह के व्यंजनों में होता है।

आमा खोईला की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। अगर इसे सूखे और एयरटाइट डिब्बे में रखा जाए, तो यह कई महीनों तक खराब नहीं होता और अपना स्वाद बनाए रखता है।

पीढ़ी दर पीढ़ी संजोई जा रही परंपरा

ग्रामीण परिवारों में आमा खोईला बनाने की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। आज भी कई परिवार बाजार में बिकने वाले तैयार मसालों के बजाय घर में बने आमा खोईला को प्राथमिकता देते हैं, जिससे पारंपरिक स्वाद और घरेलू गुणवत्ता दोनों बरकरार रहती हैं।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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