बिहार की 150 साल पुरानी दुकान का अनोखा रसकदम, जिसे चखने के लिए विदेश से भी आते हैं लोग जीवनशैली एक घंटा पहले 2
नालंदा जिले के कराय परसूराय बाजार में स्थित एक मिठाई की दुकान अपने खास रसकदम के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। पांचवीं पीढ़ी द्वारा संचालित इस दुकान का स्वाद दशकों पुराना है और आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है।

परंपरा और स्वाद का अद्भुत संगम

मिठाई के शौकीन लोग अक्सर नई-नई जगहों की तलाश में रहते हैं, लेकिन बिहार के नालंदा जिले में एक ऐसी दुकान है जिसका स्वाद आपको कहीं और नहीं मिलेगा। कराय परसूराय बाजार में स्थित रामधनी जी की मिठाई की दुकान न केवल अपनी पुरानी विरासत के लिए जानी जाती है, बल्कि यह अपने 150 साल पुराने स्वाद के लिए भी मशहूर है। यहां का खास रसकदम अपनी एक अलग पहचान रखता है, जिसे चखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

पांचवीं पीढ़ी संभाल रही विरासत

इस ऐतिहासिक दुकान की कमान अब पांचवीं पीढ़ी के हाथों में है। वर्तमान संचालक आनंद बताते हैं कि यह दुकान न केवल स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय है, बल्कि यहां की मिठाई दिल्ली, कोलकाता, पटना और रांची जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ विदेश तक भेजी जाती है। एक दौर था जब यहां से हर हफ्ते ट्रेन के जरिए मिठाई कोलकाता तक पहुंचाई जाती थी। इस दुकान से हुनर सीखकर अब तक 40 से ज्यादा कारीगर अपनी अलग दुकानें चला रहे हैं, लेकिन वे भी उस खास स्वाद को दोहराने में सफल नहीं हो पाए।

क्या है रसकदम के खास स्वाद का राज?

आनंद के अनुसार, इस मिठाई की खासियत इसकी शुद्धता और बनाने की विधि में छिपी है। इसे तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा:

  • सबसे पहले शुद्ध दूध से छेना तैयार किया जाता है।
  • छेने के ऊपर शुद्ध खोवे का लेप लगाया जाता है।
  • मिठाई की कोटिंग के लिए पोस्ता दाना (खसखस) का इस्तेमाल किया जाता है।
  • स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें इलायची और अन्य मसालों का मिश्रण मिलाया जाता है।

फिलहाल इस दुकान पर 12 कारीगर काम कर रहे हैं और यहां रसकदम की कीमत 550 रुपए प्रति किलो है।

दशकों का अनुभव, पुरानी यादें

दुकान के पुराने कारीगर अनिल यादव, जो करीब 50 वर्ष के हैं, बताते हैं कि वे उस दौर से इस दुकान से जुड़े हैं जब सिलाई-बुनाई की मजदूरी मात्र 40-60 पैसे हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि यहां के दूध, खोवे और पानी की गुणवत्ता ही इस दुकान की असली पहचान है। यही वजह है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी यहां का स्वाद आज भी बरकरार है और लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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