पाकिस्तान पर भड़के रिपब्लिकन सांसद, जेडी वेंस को दिलाई ओसामा बिन लादेन और आतंकवाद की याद विश्व एक घंटा पहले 2
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस द्वारा पाकिस्तान और वहां के सेना प्रमुख की तारीफ किए जाने पर रिपब्लिकन सीनेटरों ने तीखी नाराजगी जताई है। सांसदों ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और ओसामा बिन लादेन को पनाह देने का गंभीर आरोप लगाया है।

जेडी वेंस के बयान पर मचा बवाल

स्विट्जरलैंड में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान और वहां के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की जमकर तारीफ की थी, जिसके बाद अमेरिकी राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। वेंस ने एक बयान में कहा था कि वह पाकिस्तान से प्यार करते हैं और उनकी जिंदगी में आसिम मुनीर का एक महत्वपूर्ण स्थान है। इतना ही नहीं, वेंस ने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में उन्होंने किसी और व्यक्ति के मुकाबले मुनीर से सबसे अधिक बातचीत की है। इस बयान के बाद रिपब्लिकन पार्टी के ही दो बड़े सीनेटरों ने उन पर निशाना साधा है।

आतंकवाद पर सांसदों का कड़ा रुख

फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका अपने असली दोस्तों की पहचान करे। उन्होंने स्पष्ट रूप से पाकिस्तान और कतर को आतंकवादियों को पनाह देने वाला देश बताया। स्कॉट का कहना है कि ये देश शांति दूत बनने का दिखावा कर रहे हैं, जबकि असलियत में ये ईरान के आतंकवादी मंसूबों को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।

ओसामा बिन लादेन का जिक्र

मोंटाना के सीनेटर टिम शीही ने एक कदम आगे बढ़कर पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड की याद दिलाई। पूर्व नेवी SEAL रहे शीही ने कहा कि जेडी वेंस को यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन को पूरे दस साल तक अपनी धरती पर छिपाकर रखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के माध्यम से आतंकवाद को फंडिंग की जाती है। शीही ने यह भी कहा कि जो देश खुद आतंकवाद का समर्थक रहा है, उसे मध्यस्थ के रूप में देखना एक बड़ी गलती है।

मध्य पूर्व में अमेरिका के भरोसेमंद साथी

सांसदों का मानना है कि ईरान के साथ किसी भी वार्ता या शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसके बजाय, उन्होंने इजराइल, सऊदी अरब और UAE को मध्य पूर्व में अमेरिका का असली और विश्वसनीय सहयोगी बताया। उनका तर्क है कि अगर कोई शांति वार्ता होनी है, तो इन देशों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि उन देशों को जो मनी लॉन्ड्रिंग और विद्रोहों को फंड करने के लिए जाने जाते हैं। यह पूरा विवाद ईरान के साथ जारी शांति प्रयासों के बीच शुरू हुआ है, जिसमें पाकिस्तान और कतर की भूमिका को लेकर अमेरिकी गलियारों में गहरी फूट दिखाई दे रही है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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