बिहार
एक दिन पहले
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सम्राट चौधरी का योगी मॉडल और एनकाउंटर पर विवाद
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपराध पर नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से प्रेरित नजर आते हैं। उन्होंने प्रदेश में अपराधियों को पकड़ने के बजाय पुलिस को सीधे एक्शन और एनकाउंटर की खुली छूट दी है। हालांकि, भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद सम्राट चौधरी की यह नीति सवालों के घेरे में आ गई है। इस घटना के बाद पैदा हुए व्यापक जनाक्रोश और बढ़ते दबाव के कारण उन्हें मजबूरन न्यायिक जांच के आदेश देने पड़े हैं। विपक्षी दल इसे लेकर लगातार हमलावर हैं, जबकि एनडीए के भीतर से भी कुछ नेताओं ने इस पर नाराजगी जाहिर की है।
तेजस्वी यादव और सियासी दांवपेच
राजद के कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की है। तेजस्वी ने एनकाउंटर को जातिगत रंग देते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस खास जातियों के अपराधियों को निशाना बना रही है। हालांकि, वे इस विषय को पूरे राज्य में जनाक्रोश में तब्दील करने में पूरी तरह सफल नहीं रहे, लेकिन भरत तिवारी का मामला लोगों की नाराजगी का बड़ा कारण बन गया है, जिसने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है।
शुभेंदु अधिकारी और सम्राट चौधरी की तुलना
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बिहार के सम्राट चौधरी दोनों ही हालिया दौर में चर्चा में हैं। दोनों ने करीब एक समय पर सत्ता संभाली है। शुभेंदु अधिकारी का जन्म 1970 में हुआ, जबकि सम्राट चौधरी 1968 में जन्मे हैं। पश्चिम बंगाल में भी पुलिस अपराधियों और भ्रष्टाचारियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है। वहां स्पेशल टास्क फोर्स ने बड़ी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए हैं और राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया है। वहीं, सम्राट चौधरी का ध्यान सीधे एनकाउंटर नीति पर केंद्रित रहा है, जो अब उनके लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।
नीतीश कुमार का पुराना सुशासन फार्मूला
बिहार में अपराध नियंत्रण का पुराना मॉडल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रहा है। अपने पहले कार्यकाल (2005-2010) में नीतीश कुमार ने बिना किसी एनकाउंटर मॉडल के, कानून का राज स्थापित करके अपराधियों को जेल भेजा था। उस समय उनकी छवि सुशासन बाबू के रूप में बनी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि सम्राट चौधरी शायद नीतीश के उस पुराने फार्मूले से आगे निकलने की कोशिश में उत्तर प्रदेश का मॉडल अपना रहे हैं, जो वर्तमान स्थिति में काफी विवादास्पद साबित हो रहा है।
गुप्तेश्वर पांडेय और जनाक्रोश
बिहार के पूर्व डीजीपी और अब संत बने गुप्तेश्वर पांडेय ने भी भरत तिवारी एनकाउंटर पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका स्पष्ट कहना है कि किसी निर्दोष को या बिना किसी ठोस आधार के गोली मारना पुलिस का अपराध है। इस मामले में उपजे जनाक्रोश का अंदाजा भरत तिवारी की अंत्येष्टि के दौरान उमड़ी भीड़ से भी लगाया जा सकता है। अब स्थिति यह है कि अगर गठित न्यायिक आयोग पुलिस की कमियों को उजागर करता है, तो इससे पुलिस बल के मनोबल पर विपरीत असर पड़ने की संभावना है।
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