झारखंड
एक घंटा पहले
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विचारों
रचनात्मकता से बदली पहचान
रांची की रहने वाली पूर्णिमा ने रक्षाबंधन के त्योहार को अपने हुनर से एक नई पहचान दी है। वह रक्षाबंधन के त्यौहार से करीब दो महीने पहले ही राखी बनाने के काम में जुट जाती हैं। पूर्णिमा का दावा है कि उनकी राखियां बाजार में मिलने वाली आम राखियों से बिल्कुल अलग होती हैं। उनके कलेक्शन में शिवलिंग और गणेश आकृति वाली राखियां विशेष रूप से लोकप्रिय हैं। इसके अलावा वह भाभी के लिए मांगटीका राखी भी तैयार करती हैं।
40 रुपये से शुरू होती है रेंज
पूर्णिमा की राखियों की सबसे बड़ी खासियत उनका यूनिक डिजाइन और किफायती दाम है। उनकी राखियों की कीमत मात्र 40 रुपये से शुरू होती है। वह बताती हैं कि उनके पास आने वाले ग्राहक इन राखियों की एक झलक देखते ही उन्हें पसंद कर लेते हैं क्योंकि ऐसा अनोखा संग्रह बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होता।
बिजनेस का सोशल मीडिया मंत्र
पूर्णिमा के अनुसार, इस बिजनेस को सफल बनाने के लिए बड़ी मार्केटिंग की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने अपने हुनर को सोशल मीडिया के माध्यम से एक बड़े ब्रांड का रूप दिया है। वे अपना अनुभव साझा करते हुए कहती हैं:
- इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर राखी का वीडियो बनाकर साझा करें।
- वीडियो की क्वालिटी और एडिटिंग पर खास ध्यान दें ताकि वह लोगों को आकर्षित करे।
- अच्छे वीडियो के दम पर उन्हें बेंगलुरु, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं।
मेले और मॉल में भी है मांग
पूर्णिमा का मानना है कि यदि उत्पाद यूनिक है, तो उसे बेचने के लिए प्लेटफॉर्म की कमी नहीं है। वह खुद मेलों में स्टॉल लगाती हैं, जहां लोग एक बार में 1,000 से 2,000 रुपये तक की खरीदारी कर लेते हैं। उनका कहना है कि अगर आपके पास बेहतरीन और अलग हटकर कलेक्शन है, तो आप इसे स्थानीय बाजारों और मॉल में भी आसानी से बेच सकते हैं। उन्होंने उन सभी के लिए एक मिसाल पेश की है जो घर बैठे कम निवेश में अपना खुद का स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं।
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