उपनाम: हस्तशिल्प
सिक्की घास ने बदली छपरा की महिलाओं की किस्मत, घर बैठे कर रहीं हजारों की कमाई
छपरा के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं जीविका परियोजना की मदद से सिक्की घास से बेहतरीन हस्तशिल्प उत्पाद बना रही हैं। स्थानीय मेलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए इन उत्पादों की भारी मांग है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।
नैनीताल में बदलते मौसम के साथ बढ़ी हाथ से बुनी टोपियों की मांग, सैलानियों को लुभा रहा पहाड़ी महिलाओं का हुनर
उत्तराखंड के नैनीताल में ठंड की दस्तक के साथ ही गर्म कपड़ों का बाजार सज गया है, जहां स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हाथ से बुने ऊनी उत्पादों की भारी मांग देखी जा रही है।
रांची की उषा की सफलता की कहानी: ₹5,000 के डिजाइनर ब्लाउज और 20,000 वफादार ग्राहकों का साम्राज्य
रांची की रहने वाली उषा ने दो दशक पहले घर से सिलाई के छोटे से काम को एक बड़े ब्रांड में तब्दील कर दिया है। आज उनके द्वारा तैयार किए गए विशेष डिजाइनर ब्लाउज ₹5,000 तक में बिकते हैं और उनके पास 20,000 से अधिक स्थाई ग्राहक हैं।
पटियाला से बोकारो तक का सफर, हुनर के दम पर राजेश ने खड़ा किया जूतियों का अनोखा कारोबार
पंजाब के पटियाला के रहने वाले राजेश पिछले 20 वर्षों से पारंपरिक पंजाबी जूतियां बनाने और बेचने का काम कर रहे हैं। वे बोकारो सहित झारखंड के कई शहरों में अपने इस स्वदेशी हुनर के जरिए न केवल परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे...
रांची में बांस से तैयार हो रही 100 ग्राम की साड़ियां, ₹10,000 तक है कीमत
झारखंड की राजधानी रांची में बांस के रेशों से बेहद हल्की और आरामदायक साड़ियां और सलवार सूट तैयार किए जा रहे हैं, जो हर मौसम के अनुकूल हैं।
सफलता की कहानी: हाथ से बनी पटियाला जूतियों के जादूगर पवन, 20 हजार से ज्यादा लोग हैं दीवाने
झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले पवन पटियाला जूती बनाने के अपने पारंपरिक हुनर से देशभर में मशहूर हो गए हैं। अपनी मेहनत और हुनर के दम पर उन्होंने 20 हजार से अधिक ग्राहकों का भरोसा जीता है और लोग उन्हें प्यार से 'जूती किंग' कहते हैं।
मुजफ्फरपुर की शाही लीची का नया रूप, सुजनी कला के जरिए तैयार हुई ‘लीचीपुरम आर्ट’
बिहार के मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची अब केवल स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुजनी शॉल पर कलात्मक रूप से उकेरा जा रहा है। ‘लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान’ के तहत स्थानीय कलाकारों ने कला और रोजगार को जोड़ने की अनूठी पहल की है।
रांची की पुष्पा का हुनर: किसान माता-पिता की बेटी ने कला से संवारी अपनी तकदीर, जानिए कैसे बनी आत्मनिर्भर
रांची की 20 वर्षीय पुष्पा ने अपनी कलाकारी को व्यवसाय में बदलकर मिसाल कायम की है। फाइन आर्ट्स की पढ़ाई के बाद वे वर्ली, सोहराई और डोकरा आर्ट के साथ मिट्टी की ज्वेलरी बनाकर अब लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
जयपुर के इस दंपति ने जूट से बनाया करोड़ों का कारोबार, घर से शुरू कर विदेशों तक पहुंचाई हस्तकला
राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक दंपति ने जूट से बने इको-फ्रेंडली उत्पादों के साथ एक सफल स्टार्टअप शुरू किया है, जिससे आज सैकड़ों महिलाएं रोजगार प्राप्त कर रही हैं।
उत्तराखंड की अनोखी 'मालू' बेल: सिंगोड़ी मिठाई का स्वाद बढ़ाने से लेकर पत्तल और रस्सी बनाने तक, जानें इसके लाजवाब फायदे
उत्तराखंड के पहाड़ी जंगलों में पाई जाने वाली मालू की लकड़ीदार बेल स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनजीवन का एक बेहद अहम हिस्सा है। इसके पत्तों का इस्तेमाल प्रसिद्ध सिंगोड़ी मिठाई को लपेटने और पत्तल-दोने बनाने में होता है, जबकि इसकी छाल से मजबूत रस्सियां और चटाई ब...
सफलता की कहानी: आदिवासी कला से संवर रही सूरज की जिंदगी, हर महीने हो रही है 50 हजार की कमाई
रांची के रहने वाले सूरज डोकरा आर्ट और लकड़ी की नक्काशी के जरिए अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं, जिससे वे न केवल अपनी संस्कृति को सहेज रहे हैं, बल्कि हर महीने शानदार कमाई भी कर रहे हैं।
कांजीवरम साड़ियों पर चढ़ा मंजूषा कला का रंग, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी बनीं इस अनूठी कला की मुरीद
भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला अब दक्षिण भारत की प्रसिद्ध कांजीवरम साड़ियों पर नजर आएगी। इस नए प्रयोग ने अंग क्षेत्र की लोक कला को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई है।
कचरे से कंचन: पूर्वी चंपारण के पवन श्रीवास्तव ने केले के बेकार तने से बनाया धागा, अब कपड़ा उद्योग में मचाएंगे धूम
बिहार के पूर्वी चंपारण में एक किसान ने अनोखी पहल की है। बेकार फेंक दिए जाने वाले केले के तने से धागा तैयार कर वे टोपी, बैग और मैट के बाद अब वस्त्र निर्माण क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं।
भागलपुर की नई पहचान: बांस के आकर्षक सामानों से सज रहे हैं घर
भागलपुर का एक गांव बांस से बने सजावटी सामानों के जरिए अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। लोग पारंपरिक सजावट को छोड़कर अब पर्यावरण के अनुकूल बांस के उत्पादों को अपना रहे हैं।
जमशेदपुर के विष्णु ने नदी किनारे उगने वाली घास से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, 100 लोगों को दिया रोजगार
जमशेदपुर के विष्णु ने सवाई घास और खजूर के पत्तों के जरिए हस्तशिल्प का एक सफल स्टार्टअप खड़ा किया है, जिससे आज 100 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आजीविका मिल रही है।