रांची का नगरी गांव बना मिनी इंडस्ट्रियल हब, खेतों के बीचों-बीच चल रही हैं 6 बड़ी कंपनियां झारखंड एक घंटा पहले 3
झारखंड की राजधानी रांची स्थित नगरी गांव एक अनोखी औद्योगिक और कृषि पहचान के रूप में उभरा है। यहां खेत के बीच 6 बड़ी कंपनियां स्थापित हैं और गांव का हर घर खेती से जुड़ा है, जिससे गांव का कोई भी व्यक्ति बेरोजगार नहीं है।

रांची के करीब खुशहाली की मिसाल बना नगरी गांव

झारखंड की राजधानी रांची से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगरी गांव इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस गांव को न केवल खेती के लिए बल्कि एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। गांव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां खेत के बीचों-बीच 6 बड़ी औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। इन कंपनियों की दूरी आपस में 50 मीटर से भी कम है। इस गांव की उन्नति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां की जमीन का एक इंच भी हिस्सा खाली नहीं छोड़ा गया है।

खेती और उद्योग का अनूठा मेल

नगरी गांव के निवासी मनीष महतो बताते हैं कि इस गांव की समृद्धि का असली आधार यहां की उपजाऊ जमीन और मेहनत करने वाले किसान हैं। गांव का प्रत्येक व्यक्ति खेती से जुड़ा है। यहां रहने वाले हर व्यक्ति के पास कम से कम 2 डिसमिल जमीन अवश्य है। छोटे से छोटे भूखंड पर भी किसान तीन तरह की सब्जियां उगाते हैं। मनीष के अनुसार, उनके पास खुद की 2 एकड़ जमीन है, जहां वे आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। गांव में गन्ने और स्वीट कॉर्न की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।

खाली जमीन का कोई स्थान नहीं

गांव की भौगोलिक स्थिति पर नजर डालें तो हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है। मनीष का कहना है कि यहां जमीन खाली रहने का कोई सवाल ही नहीं उठता। अगर किसी के पास बहुत कम जगह भी है, तो वहां प्याज, लहसुन, मिर्च, परवल या भिंडी जैसी दैनिक जरूरत की फसलें उगा ली जाती हैं। यहां की मिट्टी का पीएच लेवल और उर्वरक शक्ति इतनी संतुलित है कि हर प्रकार की फसल शानदार पैदावार देती है। वर्तमान में इस गांव के किसान प्रति किसान 60 से 70 टन तक गन्ना उगा रहे हैं।

स्वीट कॉर्न की प्रोसेसिंग यूनिट

नगरी गांव में करीब 100 एकड़ भूमि पर केवल स्वीट कॉर्न की खेती हो रही है। यही कारण है कि खेतों के बिल्कुल बीच में ही एक स्वीट कॉर्न प्रोसेसिंग कंपनी लगाई गई है। किसान अपनी फसल सीधे इस इकाई में भेजते हैं और उन्हें इसके बदले अच्छा भुगतान प्राप्त होता है। इसके अलावा, शुगर और चीनी निर्माण से जुड़ी कंपनियां भी यहां मौजूद हैं। यह औद्योगिक ढांचा न केवल किसानों को लाभ दे रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।

मदर डेयरी और निश्चित आमदनी

खेती के साथ-साथ डेयरी उद्योग ने भी इस गांव की तस्वीर बदल दी है। खेतों के बीचों-बीच मदर डेयरी की सुविधा उपलब्ध है, जहां गांव के पशुपालक और किसान अपना दूध सीधे जमा करते हैं। किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए दूर बाजार तक जाने की मशक्कत नहीं करनी पड़ती। महीने के अंत में उन्हें एक निश्चित राशि मिल जाती है, जिसे वे अपनी नौकरी के वेतन की तरह देखते हैं। कंपनी द्वारा उत्पादों को सीधे खरीदे जाने के कारण किसानों का आर्थिक आधार काफी मजबूत हो गया है।

महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर

नगरी गांव की सफलता में महिलाओं का बड़ा योगदान है। यहां की स्वीट कॉर्न इकाइयों में बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं काम करती हैं। एक यूनिट में एक साथ 200 महिलाएं बैठकर मकई के दाने निकालने का काम करती हैं। इन महिलाओं को प्रतिदिन मात्र 4 घंटे काम करने के बदले 12,000 से 15,000 रुपये तक का मासिक वेतन मिलता है। इस रोजगार के कारण गांव में बेरोजगारी का नामोनिशान नहीं बचा है, जिसे देखकर ही इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

खूबसूरती और पर्यटन का केंद्र

मनीष महतो के मुताबिक, नगरी गांव सिर्फ कमाई के मामले में ही आगे नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता से भी भरपूर है। गांव के चारों ओर फैले पहाड़ और हरियाली इसे एक आकर्षक पर्यटन स्थल बनाती है। खेती के बीचों-बीच स्थित यह गांव अपनी हरियाली के लिए मशहूर है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग यहां लॉन्ग ड्राइव पर आते हैं और सुकून के कुछ पल बिताने के लिए रुकते हैं। यह गांव औद्योगिक विकास और कृषि के बीच एक बेहतरीन सामंजस्य की तस्वीर पेश करता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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