उदयनिधि स्टालिन का सरकार पर बड़ा आरोप, कहा मेरे भाषण के साथ की गई छेड़छाड़ और कट-एंड-पेस्ट का खेल भारत एक घंटा पहले 5
डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने हिरासत से रिहाई के बाद राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को गलत तरीके से पेश किया गया ताकि किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।

गिरफ्तारी के बाद उदयनिधि स्टालिन ने खोला मोर्चा

चेन्नई में डीएमके नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे उदयनिधि स्टालिन को हिरासत से रिहा कर दिया गया है। रिहाई के बाद उन्होंने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उदयनिधि ने दावा किया कि उनके भाषण के साथ छेड़छाड़ की गई है और उसे कट-एंड-पेस्ट करके सोशल मीडिया पर फैलाया गया है। इसी एडिटेड वीडियो के आधार पर उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था। उदयनिधि ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार असल में किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर होने वाली किसी भी चर्चा को दबाना चाहती है, लेकिन वे और उनकी पार्टी इन हथकंडों से डरने वाले नहीं हैं। यह पूरी घटना रविवार को तंजावुर में आयोजित उस प्रदर्शन के बाद शुरू हुई, जहां उन्होंने किसानों के समर्थन में अपनी बात रखी थी।

भाषण को गलत तरीके से पेश करने का आरोप

उदयनिधि स्टालिन के अनुसार, यह पूरी साजिश विधानसभा सत्र से ठीक पहले रची गई थी। विपक्षी दल किसान आंदोलन के मुद्दे को प्रमुखता से सदन में उठाने की तैयारी में थे। ऐसे में सरकार ने ध्यान भटकाने के लिए उनके भाषण का एक हिस्सा काटकर उसे गलत संदर्भ में पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सोमवार की सुबह प्रसारित किए गए वीडियो में ऐसे दावे किए गए जो उन्होंने कभी किए ही नहीं थे। यह एडिटेड क्लिप राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों तक भी पहुंचाई गई। उदयनिधि ने बताया कि जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने आई, तो उन्होंने बिना किसी विवाद के पूरा सहयोग किया। उन्होंने पत्रकारों से भी यही कहा कि उन पर उन शब्दों के लिए कार्रवाई की जा रही है जो उनके द्वारा कभी बोले ही नहीं गए, जो कि पूरी तरह से हास्यास्पद है।

डरने वाले नहीं हैं डीएमके नेता

अपने कड़े तेवर दिखाते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सरकार उन्हें डराने की कोशिश कर रही है, लेकिन यह संभव नहीं है। उन्होंने अपनी विरासत का जिक्र करते हुए कहा, 'मैं कलाईनार एम. करुणानिधि का पोता हूं, एम.के. स्टालिन का बेटा हूं और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का एक निष्ठावान सदस्य हूं। ऐसी कार्रवाइयों से हम डरने वाले नहीं हैं।' उन्होंने दोहरे अर्थ वाले बयानों के आरोपों को सिरे से खारिज किया और जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति के प्रति कोई भी अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है। उनका एकमात्र उद्देश्य किसानों की आवाज को बुलंद करना था।

राज्य सरकार को बताया सर्कस

उदयनिधि ने मौजूदा राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे एक सर्कस करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार डीएमके विधायकों को देखते ही उन्हें गिरफ्तार करने का बहाना ढूंढती है। अब वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुलाकात करेंगे और आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे। अपने करीब 25 मिनट के भाषण का जिक्र करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने किसानों से किए गए सरकारी वादों की असफलता पर सवाल उठाए थे। साथ ही उन्होंने कर्नाटक की मेकेदातु बांध परियोजना पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार बांध निर्माण के लिए तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि तमिलनाडु को कावेरी नदी का हिस्सा भी नहीं मिल पा रहा है।

किसानों का मुद्दा है सर्वोपरि

उदयनिधि ने बताया कि उन्होंने विधानसभा में इस संवेदनशील मुद्दे पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था, क्योंकि यह किसी एक दल का नहीं बल्कि तमिलनाडु के तमाम किसानों का साझा मुद्दा है। हालांकि, सरकार ने उनकी इस मांग की पूरी तरह अनदेखी की। पिछले तीन महीनों में उन्होंने कावेरी और मेकेदातु मामले में मंत्रियों और सरकार की भूमिका को लेकर जो सवाल पूछे थे, उनका जवाब देने के बजाय सरकार ने उनके भाषण के साथ तोड़-मरोड़ की है।

क्या है पूरा विवाद और शिकायत

यह पूरा विवाद उस समय गरमाया जब कावेरी मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान भीड़ में से कुछ लोगों ने नारे लगाए। कथित रूप से उदयनिधि ने उस पर कोई टिप्पणी की, जिसे लेकर बाद में स्पष्ट किया गया कि उनका संकेत कावेरी के पानी की ओर था। इसके बावजूद, TVK की महिला इकाई ने तंजावुर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उदयनिधि ने अभिनेत्री तृषा को लक्षित करते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। डीएमके का कहना है कि यह पूरा मामला एक सोची-समझी साजिश है।

कानूनी धाराओं का विवरण

मंगलवार को तंजावुर (पूर्व) पुलिस ने उन्हें चेन्नई स्थित उनके निवास से हिरासत में लिया था। उदयनिधि के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61, 79, 192, 196, 296(बी), 351(2) और 352 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, उन पर तमिलनाडु महिलाओं के उत्पीड़न निषेध अधिनियम की धारा 4 और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67 भी लगाई गई है। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन उन्होंने अपने खिलाफ रचे गए फर्जी नैरेटिव के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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